श्वसन नलिका में किसी संक्रमण और रोग के कारण खांसी आना और सांस लेने में तकलीफ़ होना, अस्थमा रोग (दमा रोग) कहलाता है। आपने किसी न किसी को सांस लेने में मुश्किल होने पर इंहेलर पम्प का इस्तेमाल करते देखा होगा। यह किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकती है। इस बीमारी में श्वसन नलिका में अंदर की तरह सूजन आ जाती है। इस सूजन के कारण सांस की नली काफ़ी संवेदनशील हो जाती है। जिससे फेफड़ों में हवा कम पहुंचती है। इस आलेख में अस्थमा के उपचार के बारे में जानेंगे।

दमा रोग एक प्रकार की एलर्जी है, जिस कारण सांस लेने में तकलीफ़ हो जाती है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति सांस लेने में दिक़्क़त महसूस करता है, अक्सर उसकी सांस फूल जाती है या फिर सांस लेने में परेशानी होती है। अस्थमा रोग दो तरह का होता है – स्पेसिफ़िक और नॉनस्पेसिफ़िक ।

1. स्पेसिफ़िक – इसमें किसी एलर्जी के कारण सांस फूलने लगती है।
2. नॉन स्पेसिफ़िक – इसमें भारी काम करने पर, मौसम में बदलाव या फिर आनुवांशिक कारणों से समस्या होती है।

अस्थमा इन्हेलर
Asthma inhaler

अस्थमा रोग के कारण

– मिलावटी खान पान और ग़लत आदतें
– तनाव, क्रोध या डर
– ब्लड में संक्रमण
– पालतू जानवरों से एलर्जी
– मद्यपान या मादक पदार्थों का सेवन
खांसी, जुकाम और नज़ला
– मिर्च मसालेदार चीज़ें खाना
– फेफड़े और आंतों की कमज़ोरी
– सांस की नली में धूल जाना या ठंड लगना
– मोटापा
– अनुवांशिकता; परिवार में पहले किसी को दमा रोग हो
– दवाइयों के प्रयोग से कफ़ सूख जाना
– प्रदूषण
– महिलाओं के हार्मोंस का बदलाव

अस्थमा रोग के लक्षण

– सांस लेने में अत्यधिक परेशानी
– बीमारी के चलते सूखी खांसी
– सख़्त और बदबूदार कफ़
– सांस लेते समय ज़ोर लगाने पर चेहरा लाल होना
– छाती में जकड़न महसूस होना
– ज़ोर ज़ोर सांस लेने के बाद थक जाना और पसीना आना

अस्थमा रोग में खान-पान

– हल्का और जल्दी पचने वाला भोजन खाएँ
– लौकी, तरोई, टिंडे, मेथी, अदरक और लहसुन को खाने में प्रयोग करें
– मोटे पिसे आटे की बनी रोटियाँ और दलियाँ खाएँ
– मुन्नका और खजूर खाएँ
– गुनगुना पानी पिएँ

Asthama Care Child
Asthama Care of Child

अस्थमा रोग का घरेलू उपचार

अस्थमा रोग में घरेलू उपचार से होने वाली तकलीफ़ों को कम किया जा सकता है। संभवत: कंट्रोल किया जा सकता है।

– दमा के ट्रीटमेंट में लहसुन का प्रयोग बहुत फ़ायदेमंद है। 30 मिली दूध में लहसुन की 5 छिली कलियाँ उबालकर रोज़ सेवन कीजिए। चाहें तो अदरक वाली चाय में लहसुन की कलियाँ पीसकर डालें और इस चाय का सेवन करें।

– 1 चम्मच अदरक का रस, एक कप मेथी का काढ़ा और थोड़ा शहद मिलाकर मिश्रण तैयार करें। अस्थमा के उपचार में इसका सेवन लाभकारी है।

– 5 लौंग की कलियाँ आधा गिलास पानी में 5 मिनट उबालें। फिर इसे छानकर इसमें थोड़ा शहद मिलाकर गरमागरम पिएँ। दिन में तीन बार नियमित रूप से सेवन करने से दमा कंट्रोल में आ जाता है।

– 2 चम्मच शहद में 2 चम्मच हल्दी मिलाकर चाटने से दमा रोग कम हो जाता है।

Other Asthma Homeremedies

– तुरंत राहत पाने के लिए आप हॉट काफ़ी पी सकते हैं। इससे श्वसन नलिका साफ़ हो जाती है और सांस लेने में कोई परेशानी नहीं होती है।

– दमा रोग का देशी इलाज करने के लिए छांव में सूखे पीपल के पत्तों को जलाकर बचे हुए चूरे को सूती कपड़े से छान लीजिए। इस राख को शहद के साथ मिलाकर नियमित 2 महीने तक दिन में 3 बार चाटने से काफ़ी आराम मिलेगा।

– सरसों के तेल में थोड़ी कपूर डालकर अच्छे से गरम कर लें और थोड़ा ठंडा होने के बाद छाती और कमर पर मालिश करें। रोज़ इसकी मालिश से अस्थमा ठीक हो सकता है।

तुलसी के पत्ते पानी के साथ पीसकर 2 चम्मच शहद मिलाकर खाने से दमा रोग क़ाफ़ूर हो जाता है।

– 1 गिलास दूध में 1 चम्मच हल्दी डालकर पीने से अस्थमा कंट्रोल में रहता है और एलर्जी भी नहीं होती है।

– दमा के घरेलू उपचार में इलायची बहुत लाभकारी है। बड़ी इलायची के सेवन से हिचकी और अस्थमा दोनों में आराम मिलता है। अंगूर, बड़ी इलायची और खजूर को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें, अब इस मिश्रण को शहद के साथ चाटने से खांसी और दमा दूर होता है।

दमा का आयुर्वेदिक उपचार

आयुर्वेदिक दवाओं से इलाज करने के सबसे बड़ा फ़ायदा ये है कि इनके साइड इफ़ेक्ट नहीं होते हैं, और बीमारी का जड़ से इलाज होता है।

– 2 चम्मच आंवले का पाउडर किसी कप में डालकर इसमें 1 चम्मच शहद अच्छे से मिक्स करें। हर दिन सुबह इसे खाने से अस्थमा कंट्रोल में रहता है।

– दो तिहाई हिस्सा गाजर जूस और एक तिहाई हिस्सा पालक जूस, एक गिलास जूस पिएँ।

– जौं, बथुआ, अदरक और लहसुन का सेवन अस्थमा के रोगी के लिए फायदेमंद है।

Asthma Old Man
Asthma Care of Old Man

नैचुरोपैथी से अस्थमा का इलाज

– फलों का जूस पिएँ, इससे शरीर को पोषक तत्व मिलेंगे और टॉक्सिंस बाहर निकल जाएंगे। जूस और पानी को समान मात्रा में मिलाकर सेवन करना चाहिए।

– कफ और बलगम बनाने वाली चीज़ें खाने से बचें, जैसे चावल, शक्कर, दही और तिल।

– पेट भरकर भोजन नहीं करना चाहिए और भोजन को धीरे धीरे चबाकर खाएँ।

– खाना खाते समय पानी न पिएँ बल्कि पूरे दिन में 10 से 12 गिलास पानी पी जाएँ।

– मौसमी बदलाव के समय एलर्ट रहें।

योग द्वारा अस्थमा का इलाज

अस्थमा का उपचार करने के लिए नैचुरल होम रेमेडीज़ के प्रयोग के साथ अगर योग किया जाए तो आप को अच्छे रिज़ल्ट मिल सकते हैं। योग की शुरुआत आप अनुलोम-विलोम से कर सकते हैं। आप अगर कपाल भारती और भस्त्रिकासन करने की सोच रहे हैं, तो योगा टीचर की निगरानी में करें।

बाबा रामदेव की दवा

अगर आप अस्थमा का इलाज के लिए स्वामी रामदेव की बताई औषधि प्रयोग करना चाहते हैं तो आप दिव्य स्वसारी रस का सेवन करें। दमा से बचने और उपचार करने के लिए इसके अलावा आयुर्वेदिक दवाइयों की सूची पतांजलि की साइट पर उपलब्ध है। आप पतांजलि की साइट पर एक्सपर्ट राय भी ले सकते हैं।

होम्योपैथी में अस्थमा का इलाज

होम्योपैथिक दवाइयाँ मरीज़ों के लक्षण के अनुरूप दी जाती है। इसमें अस्थमा पैदा करने वाली एलर्जी को ख़त्म किया जाता है। होम्योपैथी में दमा के लिए कई दवाइयाँ हैं, लेकिन हम यहाँ एलर्जिक उपचार में फायदा करने वाली दवाओं के नाम दे रहे हैं। ये नाम सिर्फ़ जानकारी के लिए हैं, न कि उपचार के लिए। आप ख़ुद डॉक्टर न बन जाएँ। किसी होम्योपैथिक डॉक्टर से सलाह लेकर ही कोई दवा खाएँ।

– Allu Cepa
– Iodium
– Thuja
– Dulcamara
– Carbo Veg

दमा बढ़ने से कैसे रोकें

– इन्हेलर पम्प साथ रखें
– नाक से सांस खिंचाने की आदत बनाएँ। मुँह से सांस लेने से परेशानी बढ़ सकती है।
– खांसते और छिंकते समय मुँह पर रुमाल रखें। संक्रमण से बचने का प्रयास करें।
– परफ़्यूम, डियो और दूसरी महकने वाली चीज़ों से दूर रहें।
प्रदूषण और धूल मिट्टी वाली जगहों पर न जायें।
– स्मोकिंग और तम्बाकू का सेवन न करें। मद्यपान भी न करें।
– मिर्च मसालेदार चीज़ें न खाएँ।
– एसी, कूलर या पंखें की सीधी हवा न लें।
– ठंडी और नम जगहों से दूर रहें।
– ख़ुशबू वाली चीज़ों से एलर्जी हो तो अगरबत्ती और मच्छर भगाने वाली क्वाइल का प्रयोग न करें।

यह कोई लाइलाज बीमारी नहीं है, अगर सही समय पर इस बीमारी को पहचान कर इसका उपचार किया जाए तो इसका इलाज संभव है। इसलिए अगर आपको अस्थमा के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टरी जांच कराएँ।