डिप्रेशन को हिन्दी भाषा में अवसाद कहते हैं। यह एक मानसिक विकार है। यह विकार किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकता है। विज्ञान की दृष्टि में मस्तिष्क के रसायनों के असंतुलन के कारण अवसाद होता है। डिप्रेशन से ग्रस्त मरीज़ लम्बे समय तक उदास, दुखी और तनाव महसूस करता है। ऐसी अवस्था में उसकी जीवन में दिलचस्पी कम हो जाती है, उसको नेगटिव फ़ीलिंग्स घेर लेती हैं, और वह कोई भी काम ठीक से नहीं कर पाता है। इस आलेख में हम डिप्रेशन और उदासी दूर करने का इलाज जानेंगे।

डिप्रेशन से बाहर आने में व्यक्ति को थोड़ा समय लगता ही है। एंटी डिप्रेशन दवाओं के प्रयोग से इस विकार पर काबू पाया जा सकता है। आज तक अवसाद के स्तर को जानने के लिए कोई जांच मौजूद नहीं है।

पुरुषों की तुलना में महिलाएँ अवसाद से ज़्यादा प्रभावित होती हैं। इसकी वजह से पर्सनल और प्रोफ़ेशनल लाइफ़ दोनों पर बुरा असर पड़ता अहि और इसके अलावा इस बीमारी से मूड, लाइफ़स्टाइल और सोचने-समझने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। अगर इस विकार को समझने में देर हो जाए तो लाइफ़ मुश्किल में पड़ जाती है।

अवसाद पीड़ित
Depression patient

अवसाद और उदासी में अंतर

डिप्रेशन और उदासी में अंतर समझना ज़रूरी है, क्योंकि हम सभी कभी न कभी उदासी का सामना करते हैं। कभी कभार उदासी होना सामान्य बात है लेकिन जब मरीज़ उदास ही रहने लगे तो प्रॉब्लम हो जाती है। लगातार दुख महसूस करके उदासी में डूबे रहना ही डिप्रेशन कहलाता है। डिप्रेशन से बचने और इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए इसके बारे में जानकारी होना ज़रूरी है।

उदासी – किसी बुरी घटना और स्थिति में उदास और दुखी होना। एक बार स्थान और परिस्थिति बदलने पर या थोड़ा समय बीत जाने पर उदासी ख़त्म हो जाती है।
डिप्रेशन – अवसाद में पीड़ित किसी बात को लेकर उदास नहीं होते हैं, बल्कि हर बात में नेगटिव चीज़ को लेकर उदास रहने लगते हैं। बिना किसी कारण नेगटिव सोच हर समय दिमाग़ में बनी रहती है।

डॉक्टरी भाषा में डिप्रेशन

– हर समय उदास और तनाव ग्रस्त रहना
– बात-बात पर मूड ख़राब होना
– मनपसंद काम को करने में ख़ुद को लाचार महसूस करना और लाइफ़ को बोझिल समझना
– नींद न आना, नींद बार टूटना या फिर नींद बहुत अधिक आना
– भूख ज़्यादा लगने से वज़न बढ़ना या भूख कम लगने से वज़न गिरना

डिप्रेशन होने की वजह

डिप्रेशन का बाहरी कारण अधिक चिंता और तनाव है। इसके लिए ज़्यादातर हालात ज़िम्मेदार होते हैं। अवसाद शारीरिक परेशानियों से जुड़ा हो सकता है, जैसे शारीरिक ट्रामा या फिर हार्मोन में होने वाले अवांछित बदलाव आदि। साथ कुछ अन्य कारण भी होते हैं:

– किसी अपने दूर होना
– किसी परीक्षा में फ़ेल होना
– नौकरी छूट जाना या पैसों का नुक़सान होना
– मेहनत के बावजूद सही परिणाम न मिलना
– रिटायरमेंट के बाद ख़ुद को बेकार समझना
– कर्ज़ बढ़ जाना और चुकाने में असमर्थ होना

पैसिव एग्रेशन की वजह से भी व्यक्ति अवसाद से घिर जाता है। एग्रेशन दो तरह का होता है – एक्टिव और पैसिव। एक्टिव एग्रेशन में व्यक्ति अपना ग़ुस्सा लड़ाई झगड़ा करके निकालता है, वहीं पैसिव में व्यक्ति अपनी बात मन में दबाए रखता है, जिससे कुंठा बढ़ जाती है। इस तरह डिप्रेशन की समस्या जन्म ले लेती है।

अवसाद के लक्षण

किसी रोग के लक्षण पता हों तो उसका उपचार और बचाव करने में आसानी हो जाती है। डिप्रेशन के लक्षण हर व्यक्ति में अलग अलग हो सकते हैं। इसके अलावा कुछ व्यक्ति अवसाद को कम समय अनुभव करते हैं और कुछ लोग इससे लम्बे समय तक जूझते रहते हैं। इस बीमारी के सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:

– जीवन से निराश होना और खालीपान महसूस करना
– भूख ज़्यादा या कम लगना
– नींद ज़्यादा या कम लगना
– हमेशा थकावट महसूस करना
– कोई निर्णय न ले पाना
– एकाग्रता की कमी
– बेचैनी और चिड़चिड़ापन
– जीवन में नीरसता और बेबसी महसूस करना
– दूसरों से दूरियाँ बना लेना
– ख़ुदकुशी करने की सोचना
– किसी को आहत करने की सोचना

Identify depression
Identify depression

डिप्रेशन में क्या करें

– जब अवसाद के लक्षण लम्बे समय तक दिखें तब व्यक्ति को अकेला नहीं रहना चाहिए। डिप्रेशन का इलाज संभव है। इस बीमारी में रोगी को शारीरिक से ज़्यादा मानसिक रूप से स्वस्थ रहने की ज़रूरत होती है। इसलिए दोस्त बनाएँ और अकेले बिल्कुल न रहें।
– इस बीमारी में व्यक्ति स्वयं को दुनिया से पूरी तरह से काट लेता है, ऐसे में बाहर निकलने के बारे में सोचना मुश्किल काम है। इसलिए नए दोस्त बनाएँ और उनके साथ एंज्वाय करें। अपने दोस्तों के साथ ग्रुप बनाकर नई नई एक्टिविटी में पार्टिसिपेट करें।

– शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नींद बहुत ज़रूरी है। अगर मरीज़ को नींद की समस्या है तो डॉक्टरी सलाह का पालन करें।
– सिगरेट, शराब और दूसरे ड्रग्स डिप्रेशन के मरीज़ की समस्या को और बढ़ा देते हैं। अगर मरीज़ को नशे की लत हो तो उसे छोड़ने के लिए उपाय करें या नशा मुक्ति केंद्र की हेल्प लें।

अवसाद का उपचार

डिप्रेशन कभी अपने आप ख़त्म नहीं होता है। अगर कोई व्यक्ति अवसाद महसूस करता है, तो इससे निकलने के लिए उपाय करने की ज़रूर पड़ती है। इस विकार से छुटकारा पाने के लिए डॉक्टरी सलाह के साथ आप घरेलू उपाय और एक्टिविटी भी कर सकते हैं।

1. नियमित व्यायाम

– डिप्रेशन से ग्रस्त व्यक्ति शारीरिक श्रम नहीं करता है, लेकिन तनाव और बेचैनी से छुटकारा पाने के लिए शारीरिक श्रम ज़रूरी है।
– रोज़ 15 मिनट तेज़ चलना, नाचना, जॉगिंग करना या साइकल चलाना बहुत लाभदायक होता है।
– अकेले एक्सरसाइज़ करने में असहज हों तो अपने दोस्तों की हेल्प लें। नियमित व्यायाम के बाद आप अपने मूड में अच्छा बदलाव महसूस करेंगे।
– आप योग, प्राणायम, एरोबिक्स आदि भी कर सकते हैं। योग और ध्यान से मन शांत होता है। शरीर की नकारात्मकता निकल जाती है।

2. खानपान पर ध्यान

– अवसाद ग्रस्त व्यक्ति या तो ज़्यादा खाकर मोटा हो जाता है या खाना पीना छो‌ड़कर कमज़ोर।
– अगर भूख और पाचन में समस्या है तो पौष्टिक आहार लेना चाहिए। इससे शरीर को ऊर्जा मिलेगी और मूड भी ठीक रहेगा।
– भूख न लगी हो तो भी कुछ हल्का खाएँ। इससे काम करने की ताक़त मिलेगी।
डिप्रेशन से बचने के लिए सही आहार

3. अपनी प्रॉब्लम शेअर करें

– उन बातों को अपने घर में किसी से न छुपाएँ जो अवसाद की असली वजह है। इससे आपको अपनी प्रॉब्लम का सही हल जल्दी मिल जाएगा।
– किसी के लिए भी ख़ुद को डिप्रेशन ग्रस्त मानना आसान नहीं है। तो फिर इस बात को किसी दूसरे के साथ शेअर करना तो दूर की बात है। इस बीमारी से लड़ने के लिए किसी सपोर्ट की ज़रूरत होती है। जो मरीज़ की बात को सुनकर सही हल दे सके। वह जिस पर पूरा विश्वास कर सकें। इससे उसका मन हल्का हो जाएगा और बीमारी भी जल्दी ठीक हो जाएगी।
– अपनी फ़ीलिंग्स शेअर करने के बाद जीवन में सकारात्मकता लाने की ज़रूरत है। इसके लिए काउंसिलर की हेल्प भी ले सकते हैं।

4. मनपसंद काम करना

अपना मनपसंद काम करके कोई भी अधिक ख़ुशी अनुभव करता है। इसलिए मरीज़ का जिस काम में मन लगे उसको वह काम करने दें। इससे वह जल्दी ठीक हो जाएगा। जैसे – संगीत सीखना, डैंस करना, गेम खेलना, घूमना फिरना, मूवी देखना आदि।

5. साइकेट्रिस्ट की हेल्प

डिप्रेशन ज़्यादा पुराना हो जाए तो दूसरी शारीरिक और मानसिक बीमारियाँ हो जाती हैं। किसी अच्छे साइकेट्रिस्ट से मिलकर अपनी फ़ीलिंग्स उससे शेअर करें। वह आपको बताएगा कि डिप्रेशन है भी या नहीं। यदि डिप्रेशन हुआ तो वह आपको सही दवा देगा, जिसे नियमित रूप से खाकर आप डिप्रेशन से छुटकारा पा सकते हैं।

Psychiatric counselling
Psychiatric counselling

डिप्रेशन से बाहर निकलने के उपाय

अगर मरीज़ को लगता है कि उसक जीवन बेकार है, तो उसे बिल्कुल भी अकेला मत छोड़ें। आज समाज में डिप्रेशन के मरीज़ों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसलिए आपको अवसाद से बाहर निकलने के उपाय पता होने चाहिए।

1. दवाइयाँ

– दवा का असर 24 घंटे के लिए होता है, इसलिए रोज़ सही समय पर दवा खानी चाहिए। अगर सुबह 8 बजे नाश्ते के बाद दवा लेनी है, तो कभी इसे दोपहर में खाने की ग़लती न करें और एक दिन भी दवा न छोड़ें।
– गर्भवती स्त्री को डिप्रेशन का इलाज कराते समय डॉक्टर को अपने गर्भवती होने की बात स्पष्ट बता देनी चाहिए। कुछ एंटी डिप्रेशन दवाएं होने वाले शिशु के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं।
– डिप्रेशन का इलाज कई महीने चलता है, इसलिए लाभ मिलने लगे तो दवाएँ छोड़ने की भूल न करें। वरना इलाज फिर से शुरु करना होगा।

2. अच्छी यादें

– ज़िंदगी में ख़ुश रहने के लिए अच्छी यादों को अपने क़रीब रखिए और बुरी बातों को भूल जाइए।
– अच्छी यादें बनाने पर भी ध्यान दीजिए, अच्छे अच्छे काम कीजिए।

डिप्रेशन के लिए काउंसिलिंग और ट्रीटमेंट

डिप्रेशन का उपचार दवाओं और काउंसिलिंग दोनों से किया जाता है। टॉक थेरेपी, काउंसिलिंग और साइको सोशल थेरेपी डिप्रेशन के उपचार में बहुत हेल्पफ़ुल हैं। ये थेरेपी डिप्रेशन ख़त्म करने और जीवन को दिशा देती हैं। भविष्य में डिप्रेशन से निपटने के लिए रास्ते भी सिखाती हैं।

– जब शुरुआती दवाएँ बेअसर हो जाती हैं, तब एंटी-डिप्रेशन दवाइयाँ दी जाती हैं।
– एंटी डिप्रेशन दवाओं में नए नए शोध हो रहे हैं, इसलिए अब जो दवाएँ उपलब्ध हैं वो मस्तिष्क के रसायनों का संतुलन बनाने में मदद करती हैं और उनके साइड इफ़ेक्ट न के बराबर होते हैं।
– डिप्रेशन की दवाएँ डॉक्टरी सलाह से लेनी चाहिए। कुछ दवाएँ ऐसी होती हैं, जिनकी मरीज़ को लत लग सकती है।

डिप्रेशन पागलपन नहीं है

लोग डिप्रेशन को लोग पागलपन से जोड़कर देखते हैं। पर उनको पता नहीं है कि पागलपन एक बिल्कुल अगल चीज़ है, डॉक्टर भले ही एक है, लेकिन बीमारी अलग है।

पारिवारिक सपोर्ट

– मरीज़ को मरीज़ होने का आभास न कराएँ
– तक़लीफ़ देने वाली बातें न करें
– मरीज़ को उसकी ताक़त और उपलब्धियाँ बार बार याद दिलाएँ

डिप्रेशन का होम्योपैथिक इलाज

होम्योपैथी में भी अवसाद का इलाज है। इस पद्धति में केस स्टडी करने डॉक्टर दवा निर्धारित करते हैं। डिप्रेशन की होम्योपैथिक सामान्य दवाओं के नाम हैं:

– Igntia
– Nuz-V198omica
– Pulsatila
– Arsenicum-Album

कोई भी दवा शुरु करने से पहले डॉक्टर से सलाह करें, नहीं फ़ायदे की जगह नुक़सान भी हो सकता है।

डिप्रेशन के लिए आयुर्वेदिक उपचार

– आयुर्वेदिक उपचार के लिए आप किसी डॉक्टर से मिलें।
– इसके अलावा प्रार्थना, ध्यान और मंत्रोच्चारण से भी हार्मोन संतुलित किए जा सकते हैं।

जो लोग डिप्रेशन के शिकार होते हैं वो दुखी और निराश होते हैं और जल्दी अपने जीवन के हार मान लेते हैं। डिप्रेशन अगर हद पार कर जाए तो लोग आत्महत्या भी कर लेते हैं। अगर आप किसी ऐसे मरीज़ को जानते हैं तो उसके साथ दोस्ती करें, उसकी हरक़तों पर नज़र रखें, और डॉक्टर से नियमित बात करवाएँ।