आपने चरस, गांजा और भांग ‌‌_ Marijuana से नशा करने के बारे में सुना होगा। जो लोग इनका नशा करते हैं, वो इसके आदि हो जाते हैं। जिससे उनके शरीर को भारी नुक़सान हो पहुंचता है। लेकिन शायद आपको पता ही होगा, कि बहुत सी दवाइयों में इनका प्रयोग भी किया जाता है। अगर इसका मात्रा में इनका सेवन किया, जो अनेक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।

भांग मेरुआना
Marijuana Afeem Bhang

भांग का दवा के रूप में प्रयोग

आइए मेरुआना दवाइयों में प्रयोग और फ़ायदों पर एक नज़र डालते हैं।

1. सिर चकराना

सिर चकराने पर गांजे का सही मात्रा में प्रयोग करने से एपिलेप्सी अटैक को टाला जा सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कैनाबिनॉएड्स नामल तत्व मस्तिष्क को शांत करने वाली कोशिकाओं में मध्य सिग्नल ट्रांसमिट करते हैं।

2. ग्लूकोमा

मेरुआना ग्लूकोमा में ऑप्टिव नर्व से दबाव हटाकर दृष्टि से जुड़ी तंत्रिकाओं को दबने से बचाता है। जिससे दृष्टि दोष की समस्या काफ़ी हद तक कंट्रोल में आ जाती है। ग्लूकोमा के मरीज़ की आंखों का तारा बड़ा हो जाता है।

3. अल्ज़ाइमर

एमिलॉयड नामक ततव मस्तिष्क की कोशिकाओं को नष्ट करता है, जिससे व्यक्ति को भूलने की बीमारी हो जाती है। भांग के तेल में पाया जाने वाला टेट्राहाइड्रोकैनाबिनॉल की कम ख़ुराक़ एमिलॉयड बनने की गति धीमी कर देती है।

4. कैंसर

भांग में मौजूद कैनाबिनॉएड्स तत्व कैंसर की कोशिकाओं का ख़ात्मा करने में समर्थ है। यह ट्यूमर का विकास करने वाली रक्त कोशिकाओं की वृद्धि रोक देता है। यह कैनाबिनॉएड्स कोलन कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और लीवर कैंसर का इलाज करने में कारगर है।

5. कीमोथैरपी

मेरुआना को सटीक मात्रा में प्रयोग करने पर कीमोथैरपी के साइड-इफ़ेक्ट्स जैसे – नाक बहना, उल्टियाँ और भूख न लगना दूर हो जाते हैं। अमेरिका में एफ़डीए ने कीपोथैरपी में कैनाबिनॉएड्स वाली दवाओं की स्वीकृति दे दी है।

6. ऑटोएम्यून

हमारा रोग प्रतिरोधी तंत्र बीमारियों से लड़ते लड़ते स्वस्थ कोशिकाओं को भी नष्ट करने लगता है। यह संक्रमण शरीर के दूसरे भागों तक फैल जाता है। इस बीमारी का नाम ऑटोएम्यून है। भांग में मौजूद टीएचसी इफ़ेक्शन बढ़ाने वाले अणुओं का डीएनए बदलकर ऑटोएम्यून का उपचार करता है।

7. मस्तिष्क की रक्षा

भांग की संतुलित मात्रा प्रयोग करने से दिमाग़ी स्ट्रोक को सीमित कर देता है। जिससे दिमाग़ को नुक़सान कम होता है।

8. मल्टीपल स्क्लेरोसिस

रोग प्रतिरोधी तंत्र में ख़राबी से मल्टीपल स्क्लेरोसिस बीमारी हो जाती है। इस बीमारी में नसों की रक्षा करने वाली फ़ैट की परत क्षतिग्रस्त हो जाती है। नसें कड़ी हो जाने के कारण बहुत दर्द होता है। मेरुआना मल्टीपल स्क्लेरोसिस के रोगियों को चक्कर खाकर गिरने से बचाता है। यह अभी तक असाध्य है।

9. दर्द निवारक

डायबिटीज़ में मरीज़ के हाथ-पैरों की तंत्रिकाएँ क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। जिससे उस हिस्से जलन महसूस होती है। साथ नर्व डैमेज होने पर भांग आराम पहुंचाती है। एफ़डीए ने अभी तक मधुमेह के रोगियों का भांग द्वारा इलाज पर प्रतिबंध लगा रखा है।

10. हैपेटाइटिस सी

हैपेटाइटिस सी होने पर मरीज़ में थकान, मांसपेशियों का दर्द, डिप्रेशन, भूख न लगना और नाक बहने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। मेरुआना हैपेटाइटिस सी के इलाज में 86% तक सफल है।