मधुमेह, डायबिटीज या शुगर आज एक आम समस्या के रूप में सामने आ रही है। खानपान के जुड़ी ख़राब आदतों के कारण ही शुगर हो जाता है। जब ख़ून में शुगर बढ़ जाती है तो मधुमेह रोग लग जाता है। ख़ून में बढ़ी हुई शुगर कम करने के लिए परहेज़ के सिवा कोई दवा नहीं है। परहेज़ करके आप सामान्य ज़िंदगी जी सकते हैं। केवल भारत में ही 6 करोड़ से ज़्यादा मधुमेह रोगी हैं। इसलिए आज हम आपको ब्लड शुगर कंट्रोल करने के उपाय बताएंगे।

ब्लड शुगर कंट्रोल

डायबिटीज़ दो तरह की होती है:

1- इंसुलिन बनना बंद हो जाता है।
2- शरीर में ज़रूरत के अनुसार इंसुलिन नहीं बनता है और जो बनता भी वह डिस्फंक्शनल होता है।

डायबिटीज यानि शुगर के लक्षण

1- थकान
2- वज़न घटना
3- ज़्यादा प्यास लगना
4- बार बार पेशाब लगना
5- चोट और घाव धीरे धीरे भरना

ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए उपाय

1. गेहूँ के ज्वारे

गेहूँ के ज्वारे संजीवनी बूटी के समान ही गुणकारी है। आयुर्वेद में अलग अलग बीमारियों के लिए कई तरह से प्रयोग किया जाता है। गेहूँ को उपजाऊ मिट्टी में बोने के कुछ दिन बाद भी इसकी नर्म हरी पत्तियां दिखनी शुरु हो जाती हैं। इसे ही गेहूँ के ज्वारे कहा जाता है। 5-6 दिन में निकले ज्वारे बहुत लाभकारी माने गए हैं। इनसे शरीर को बहुत ताकत मिलती है।

गेहूँ के ज्वारे मधुमेह रोगियों के लिए बहुत ही लाभकारी हैं। व्हीटग्रास का रस पीने से ख़ून में कार्बोहाइड्रेट का स्तर विनियमित होता है। जिससे बड़ी हुई ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद मिलती है।

2. करेला

करेला ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मददगार है। इंसुलिन के स्राव में करेला बहुत काम आता है और मरीज़ को इंसुलिन प्रतिरोध से बचाता है। इस तरह करेला दोनों ही तरीकों से डायबिटीज़ में लाभकारी है।

इस्तेमाल

– करेले के जूस को सुबह ख़ाली पेट पीना चाहिए। सबसे पहले दो तीन करेले के बीज निकालकर रस निकाल लें। फिर उसमें पानी मिलाकर पिएं। दो तीन महीने इस उपाय को करने के बाद परिणाम नज़र आने लगेंगे।
– करेले को विभिन्न प्रकार से अपने रूपों में शामिल किया जा सकता है।

3. दालचीनी (मसाला)

दालचीनी पाउडर में ब्लड शुगर का लेवल कम करने की क्षमता होती है। यह पाउडर इंसुलिन गतिविधि को उत्तेजित करके रक्त शर्करा को घटाता है। इसमें मौजूद बायोएक्टिव एलिमेंट मधुमेह रोकने से सहायक होते हैं। यह टाइप 2 डायबिटीज़ रोगियों के लिए भी लाभकारी है। मिलावटी दालचीनी का प्रयोग हानिकारक होता है, जिससे लीवर बिगड़ सकता है।

इस्तेमाल

– आधा चम्मच दालचीनी पाउडर गरम पानी में घोलकर नियमित पिएं।
– आप खड़ी दालचीनी एक दो छोटे पीस एक गरम पानी में उबाल लें। फिर 20 मिनट बाद ठंडा करके इसे पिएं।

4. मेथी के दाने

सुगंधित मेथी आपकी रसोई में ज़रूर मौजूद होगी। इसका प्रयोग आयुर्वेद में भी किया जाता है। मेथी के बीज में घुलनशील फ़ाइबर भी बड़ी मात्रा होती है। जो कार्बोहाइड्रेड के पाचन और अवशोषण को धीमा करता है। इसका प्रयोग टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज़ में बहुत लाभदायक है।

इस्तेमाल

– 100 ग्राम मेथी के दाने, 100 ग्राम तेजपत्ता, 150 ग्राम जामुन की गुठली और 250 ग्राम बेलपत्र के पत्ते पीसकर पाउडर तैयार करें। सुबह खाली पेट और शाम का खाने से 1 घंटे पहले इस 1 चम्मच चूर्ण गरम पानी के साथ लें। तीन महीनों में शुगर लेवल कंट्रोल में आ जाएगी।
– 2 बड़े चम्मच मेथी के बीज रात भर पानी में भिगो दें और सुबह बीज के साथ ही पूरा पानी पी जाएं।
– आप 2 चम्मच मेथी पाउडर दूध के साथ भी ले सकते हैं।

5. आंवला

आयुर्वेद की सबसे महत्वपूर्ण जड़ी बूटियों में से आंवला एक है। इसमें विटामिन सी की प्रचुर मात्रा होती है, इसके जूस से अग्नाशय को शक्ति मिलती है।

इस्तेमाल

– दो तीन आंवलों के बीज निकालकर उन्हें पीसकर पेस्ट बना लें। एक साफ सूती कपड़े में बांधकर इस पेस्ट से रस निचोड़ लें। खाली पेट 2 चम्मच आंवले के रस का प्रतिदिन सेवन करने से लाभ होता है।
– एक कप करेले के रस में 2 चम्मच आंवले का रस मिलाकर रोज़ पीने से लाभ मिलता है।

6. जामुन

शुगर लेवल कंट्रोल करने में जामुन बहुत फायदेमंद है। इसमें एंथॉनिनिन, एलेगिक एसिड और हाइड्रलॉयसेबल टैनिनस आदि होते हैं। जामुन के फल, बीज, पत्तियां और छाल में शर्करा का स्तर कम करने की क्षमता होती है। जिससे ख़ून और पेशाब में शुगर लेवल तेज़ी से कम होता है।

इस्तेमाल

– जामुन अग्नाशय के लिए फायदेमंद है इसलिए इस मौसमी फल को अवश्य खाएं।
– जामुन के बीज का पाउडर बनाकर दिन में दो बार पानी के साथ इसका सेवन करें।

7. आम के पत्ते

इंसुलिन को नियंत्रित करने में आम के पत्ते का इस्तेमाल होता है। इससे लिपिड प्रोडाइल बेहतर होती है।

इस्तेमाल

– 15 आम के पत्ते एक गिलास पानी में भिगो दें और अगली सुबह खाली पेट पानी छानकर पी जाएं।
– आम की पत्तियां सुखाकर पाउडर बना लें। प्रतिदिन आधा चम्मच पाउडर दिन में दो बार पानी साथ पिएं।

8. एलोवेरा

बढ़ती ब्लड शुगर कंट्रोल में लाने के लिए एलोवेरा जैल बहुत लाभकारी है, क्योंकि इसमें फायटोस्टेरॉल्स होता है। टाइप 2 डायबिटीज में यह काफी असरदार है।

इस्तेमाल

– 1 चम्मच एलोवेरा जैल, चुटकी भर तेजपत्ता पाउडर और चुटकी भर पिसी हल्दी के मिश्रण से रक्त शर्करा को नियंत्रित किया जा सकता है। इस मिश्रण का प्रयोग खाने से पहले करना चाहिए।
– एलोवेरा के पत्तों का ताज़ा रस पी सकते हैं।
– एलोवेरा की सब्ज़ी बनाकर खा सकते हैं।

9. करी पत्ते

बढ़ती ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए करी पत्ते के इस्तेमाल की सलाह दी जाती है। इसमें मौजूद घटक ग्लूकोज से स्टार्च को तोड़ देता है। जिससे इंसुलिन ठीक से अपना काम करता है।

इस्तेमाल

– सुबह 10 ताज़ी करी पत्तियां चबाएं। तीन चार महीने यह उपाय करने से लाभ मिलेगा।

ब्लड शुगर कंट्रोल करने का आयुर्वेदिक उपाय

100 ग्राम गेहूँ, 100 ग्राम पेड़ की गोंद, 100 ग्राम जौ और 100 ग्राम कलौंजी को 5 कप पानी में डालकर 10 मिनट के लिए उबालें। फिर ठंडा होने के लिए छोड़ दें। ठंडा होने के बाद पानी को छानकार जग या बोतल में रख लीजिए। 7 दिन तक 1 छोटा कप पानी सुबह खाली पेट पिएं। 7 दिनों के बाद 1 दिन छोड़कर पिएं। 2 हफ्ते इस उपाय को लगातार करने पर शुगर लेवल नार्मल हो जाएगा। टाइप 2 शुगर के मरीज जिन्हें इंसुलिन के इंजेक्शन लगवाने पड़ते है, उनके लिए यह उपाय लाभदायक है।