वैदिक संस्कृति में डॉक्टरों वैद्य कहा जाता है। वैद्य होने वाली बीमारी के लिए प्राकृतिक और घरेलू उपचार किया करते हैं। वैद्य उपचार के लिए आयुर्वेदिक पद्धति का प्रयोग करते हैं। आयुर्वेद में अनेक ऐसी प्राकृतिक और घरेलू वस्तुओं का उल्लेख है जिससे गंभीर से गंभीर बीमारी का इलाज हो सकता है। इस पद्धति से उपचार करने पर दुष्प्रभाव भी नहीं होते हैं। इलाज भी कम खर्च में और असरदार होता है।

दादी माँ के घरेलू नुस्खे

वर्षों से अपनाये जा रहे घरेलू उपाय और नुस्खे आसानी से प्रयोग किए जा सकते हैं। इन उपायों न केवल रोग से मुक्ति मिलती है बल्कि आप अच्छा स्वास्थ्य भी प्राप्त करते हैं। सम्पूर्ण सौंदर्य के लिए भी ये उपाय बहुत कारगर होते हैं। इस लेख में आप दादी माँ के घरेलू नुस्खे और उपचार जानेंगे।

दादी माँ के घरेलू नुस्खे

हृदय रोग का इलाज

१. 1 ग्राम सूखा धनिया, 1 ग्राम सर्पगंधा और 2 ग्राम मिश्री को पीसकर ताज़े पानी के साथ खाया जाए तो उच्च रक्त चाप नियंत्रित रहता है।

२. हृदय रोग की रोकथाम के लिए 40 ग्राम आंवले के रस में 20 ग्राम गाजर का रस मिलाकर पीना चाहिए। इससे बीपी कंट्रोल किया जा सकता है।

३. गुनगुना पानी पीकर गैस और कब्ज़ को अलविदा कहा जा सकता है। इससे भूख बढ़ती है। शरीर से हानिकारक टॉक्सिक पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। साथ ही रक्त संचार भी ठीक रहता है।

४. धड़कन बढ़ने पर सेब का मुरब्बा सुबह शाम खाने लाभ होता है।

५. दिल की बीमारियों से बचे रहने के लिए रिफ़ाइंड की जगह सरसों के तेल में खाना पकायें।

६. दिल का दौरा न पड़े इसके लिए लौकी का जूस पिएं और लौकी की सब्ज़ी खायें।

आँख की देखभाल

७. आंख में मच्छर चला जाये तो उल्टे पांव पीछे चलने से मच्छर निकल जाता है।

८. आंख पर फुंसी निकल आए तो लौंग घिसकर लगाने से वह दब जाती है।

९. आंवला रस में शहद मिलाकर चाटने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।

१०. कम उम्र में चश्मा लग जाए तो आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए अखरोट के तेल से आंखों के आसपास मसाज कीजिए। इस उपाय आंख के संक्रमण दूर होते हैं और आंखों की खुजली भी ख़त्म हो जाती है।

११. आंखों में कोई इंफ़ेक्शन या सूजन हो जाने पर एक कटोरी पानी में 1 चम्मच सेब का सिरका डालकर रुई से आंखों को साफ़ करें।

१२. संतरे के रस में नमक और काली मिर्च डालकर नियमित पीने से नज़र की कमज़ोरी दूर होती है।

त्वचा की देखभाल

१३. कच्चे पपीते का रस दाद पर लगाने दाद और खुजली कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

१४. त्वचा जल जाने पर तारपीन का तेल लगाने से जलन कम हो जाती है।

१५. आग से जल जाने पर उस जगह शहद लगाने से फफोले नहीं निकलते हैं।

१६. होंठों पर कच्चा दूध लगाने से उनका कालापन दूर होता है।

१७. काले होंठों को गुलाबी करने के लिए मक्खन में केसर मिलाकर प्रतिदिन होंठों पर लगाएं।

१८. चेहरे पर झाइयाँ होने पर तारपीन का तेल लगाकर कुछ देर बाद धो लें। असरदार उपाय है।

१९. रात को सोने से पहले मुहांसों पर काली मिर्च का चूर्ण लगाने से मुहाँसे ख़त्म हो जाते हैं।

२०. टमाटर के रस को चेहरे पर लगाने से दाग़-धब्बे दूर हो जाते हैं।

२१. गाजर, टमाटर और चुकंदर का रस 1 गिलास हर दिन 2 महीने तक पीने से झाइयां, दाग़-धब्बे और मुहांसे दूर होते हैं। चेहरे पर चमक आती है और रंग निखरता है।

२२. चेहरे से तिल और मस्से हटाने के लिए रोज़ाना एलो वेरा जैल लगाएं।

२३. त्वचा रोग के उपचार के लिए अजवाइन पीसकर गाढ़ा लेप बनायें और त्वचा के प्रभावित हिस्से पर लगाएं।

२४. फोड़े फुंसी होने पर पिसी अजवाइन में नींबू का रस मिलाकर लगायें।

२५. चेहरे पर मुहांसे निकल रहे हों तो पानी में नीम के पत्ते उबालकर छान लें। छने हुए पानी से मुँह धोयें और उबले हुए पत्ते पीसकर लेप को चेहरे पर लगायें।

पेट की समस्या का इलाज

२६. लेमन टी पीने से कब्ज़, पेट की गैस और मोटापे जैसी समस्या से निजात मिलती है।

२७. अगर भूख कम लगती हो तो पका हुआ टमाटर कच्चा खाने से भूख खुलती है।

२८. प्रतिदिन सुबह शाम 1 गिलास पानी में 1 चम्मच सेब का सिरका और 1 शहद मिलाकर पीने से लीवर की कमज़ोरी और गर्मी दूर होती है। लीवर की ताक़त बढ़ाने का यह कारगर उपाय है।

२९. पेट में अम्लीयता यानि एसिडिटी हो जाने पर गुलुकंद खाने से जलन कम होती है और आराम पहुंचता है।

३०. हरा धनिया पीसकर उसका रस निचोड़ का पीने से उल्टी रुक जाती है।

३१. ख़ूनी बवासीर में ख़ून बहना रोकने के लिए 10 ग्राम धुले हुए काले तिल को ताज़ा मक्खन के साथ खाना चाहिए। इससे ख़ून जल्द ही बंद हो जायेगा।

३२. बवासीर के मस्से पर राई के तेल से लगातार मालिश करते रहने से मस्से मुरझाने लगते हैं।

३३. पीली मिट्टी को पीसकर पानी के साथ लेप बनायें। इस लेप को पेड़ू पर लगाने से पेशाब खुलकर आती है।

३४. पथरी की समस्या हो तो पथरचट्टा का 1 पत्ता और 4 दाने मिश्री पीसकर 1 कप पानी के साथ खाली पेट सेवन करें। पथरी और दर्द दोनों समस्याएँ ख़त्म होगी।

३५. गुर्दे की बीमारियों से बचने के लिए बेकिंग सोडा का प्रयोग उपयोगी है। इससे ख़ून में होने वाली अम्लता ख़त्म होती है, जो किडनी की बीमारी प्रमुख वजहों में से एक है।

३६. पपीते की जड़ 6 ग्राम पीसकर 10 ग्राम पानी में घोलकर छान लें। इस पानी को पीने से पथरी गलकर बाहर निकलती है।

३७. बच्चों को दस्त लगने पर ठंडे पानी में जायफल पीसकर सुबह शाम देना चाहिए।

३८. छोटे बच्चों की हरे पीले दस्त होने पर माँ के दूध में जायफल घिसकर देने से लाभ होगा।

३९. नींबू के रस में जायफल घिसकर पीने से दस्त खुलकर होते हैं।

४०. अजवाइन, काली मिर्च, लहौरी नमक, सोंठ, सफेद जीरा, मोटी इलायची, धनिया, पुदीना, नौसादर और काला नमक, ये सब 10-10 ग्राम और 3 ग्राम लौंग लीजिए। इन्हें पीसकर चूर्ण बनाना है। हर दिन 3 ग्राम चूरन पानी के साथ फांकने से पेट की गैस और दर्द दूर होता है। जिससे हाजमा सुधर जाता है।

४१. पेट में कीड़े होने पर 1 चम्मच कच्चे आम के छिलकों का काढ़ा दो दिन पीने से कीड़े मर जाते हैं।

४२. पेट के कीड़े होने पर लस्सी में पिसी अजवाइन मिलाकर पीने से पेट के कीड़े मरते हैं।

४३. आधा चम्मच हल्दी तवे पर भूनकर सोने से पहले खाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। छोटे बच्चों को प्याज का रस पिला सकते हैं।

४४. सुबह शौच जाने पहले तांबे के बर्तन में रात का रखा हुआ बासी पानी पीने से कब्ज़ के समस्या से छुटकारा मिलता है। ये उपाय रोज़ करना चाहिए।

४५. अगर बच्चे को पेशाब न आए तो 6 ग्राम कलमी शोरा थोड़े पानी में घोल दें। इसमें रुई डुबोकर बच्चे के मसाने पर रखें। उसे 4 मिनट में ही पेशाब हो जाएगी।

४६. पेट की बीमारियों से बचने और इलाज के लिए मूली पर काला नमक, पिसी कलौंजी और मिर्च डालकर खाने से फ़ायदा होगा।

४७. दो चम्मच मेथी दाना 1 गिलास पानी में उबालकर छान लें। इसे गुनगुना पीने से एपेंडिक्स के दर्द में आराम मिलता है।

४८. 1 माशा खड़िया मिट्टी सुबह शाम खाने से पित्त का निकलना रुक जाता है।

४९. काला पीलिया होने पर मूली के पत्तों का रस निकालकर पीना चाहिए।

५०. रोज़ाना खाने के बाद थोड़ा सा गुड़ खाने के पेट जनित अनेक बीमारियां दूर होती हैं।

५१. किसी ने कांच खा लिया हो तो उसे उबले आलू खिलाने चाहिए।

५२. पेट में किसी भी तरह का ज़हर चले जाने पर 1 ग्राम राई का चूरन पानी में घोलकर पीने उल्टी हो जाती है। जिससे विष बाहर निकल जाता है। आप सरसों का तेल भी पिला सकते हैं।

५३. गर्मी से बचने के लिए खीरा, खीरे का पानी, आम का पना, मट्ठा, छाछ और लस्सी का अधिक से अधिक सेवन कीजिए।

५४. गुर्दे की बीमारियों से बचने के लिए हर घंटे पानी पिएं। पानी पीने से किडनी में मौजूद विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं। नींबू पानी पीने से फ़ायदा है और इससे विटामिन सी भी मिलता है।

५५. अगर आपको यात्रा के समय उल्टी होने की समस्या होती है। तो यात्रा से पहले 1 चम्मच अदरक और 1 चम्मच प्याज का रस मिलाकर पीना चाहिए।

५६. हाइ यूरिक एसिड कंट्रोल करने के लिए आंवले में थोड़ा एलो वेरा जूस मिलाकर सेवन कीजिए। नारियल पानी का सेवन करने से यूरिक एसिड कम होता है।

मुँह की समस्या

५७. तुतलाहट की समस्या से छुटकारा पाने के लिए 2 ग्राम भुनी फिटकरी मुँह में रखकर सोना चाहिए। 3 महीने समस्या समाप्त हो जाएगी।

५८. मोर का पंख बच्चे के गले में बांधने से बच्चे दांत नहीं चबाते हैं और उनको रात में डर भी नहीं लगता है।

५९. अदरक का रस और शहद मिलाकर लगाने से दांत दर्द ठीक हो जाता है।

६०. 100 ग्राम आम की लकड़ी का कोयला, 10 ग्राम लाहौरी नमक और 10 ग्राम इलायची का तेल मिलाकर एक कांच की शीशी में रखें। इससे दांतों पर मंजन करने दांत सफेद होते हैं।

६१. 100 ग्राम पीली पत्ती वाला तंबाकू तवे पर हल्की आंच में चम्मच से हिलाते हुए भूनें। जब इससे धुँआ निकलना बंद हो जाए तब इसे 10 ग्राम लहौरी नमक और 5 ग्राम कालीमिर्च के साथ पीस लें। रोज़ इसे दांत और मसूढ़ों पर लगाने से ख़ून नहीं आता है और पायरिया रोग ख़त्म होता है।

६२. नियमित गेहूँ के ज्वारे का रस पीने से भी पायरिया की समस्या से निजात मिलती है।

६३. 100 ग्राम बरगद की छाल, 2 ग्राम काली मिर्च और थोड़ा कत्था मिलाकर बारीक़ पीस लें। इस चूरन से दांत मांजने से दांतों का हिलना, दांतों में सड़न और सांस की बदबू दूर हो जाएगी। दांत भी मोतियों जैसे चमकने लगेंगे। आप इस दादी माँ के घरेलू नुस्खे को प्रयोग करके दांत मसूढ़ों की बीमारियों से बचे रह सकते हैं।

सांस की समस्या

६४. नाक में अगर कुछ फंस जाए तो तम्बाकू पीसकर सुंघाना चाहिए। इससे छींक आती है और फंसी हुई चीज़ बाहर निकल जाती है।

६५. लगातार हिचकी आ रही हो तो पुदीने के पत्ते चबाने को दें या नींबू का रस चूसने को बोलें।

६६. 3 ग्राम कलौंजी का चूर्ण 1 ग्राम मक्खन में मिलाकर चाटने से हिचकी आना बंद हो जाती है।

६७. हिचकी रोकने के लिए 10 ग्राम राई को 1 गिलास पानी में उबालकर छान लें और गुनगुना ही पिएं।

६८. बच्चों की सांस चलने और पसली में दर्द होने पर सरसों का तेल हल्का गरम करके पान के पत्तों पर लगाकर दर्द वाली जगह पार बांधने से आराम मिलता है।

६९. मछली का कांटा गले में अटकने पर केला खाना चाहिए।

७०. सांस की बदबू हटाने के लिए नीम, किकर या बाबूल से दांतों और मसूढ़ों की सफ़ाई करनी चाहिए।

७१. तुलसी के पत्ते पीसकर शहद के साथ खाने से अस्थमा के उपचार में फ़ायदा मिलता है।

रक्त संबंधित समस्याएं

७२. एक गिलास मीठे दूध में 5 ग्राम बीलगिरी का चूर्ण मिलाकर पीने से ख़ून बढ़ता है। एनीमिया जैसा रोग ठीक होता है।

७३. रक्त में शर्करा की मात्रा नियंत्रित करने के लिए बीज रहित करेले का रस पानी मिलाकर पीना चाहिए। इससे 2 महीने में शुगर कंट्रोल हो जाती है।

७४. थायरॉयड का घरेलू इलाज करना है तो 1 चम्मच हरी धनिया चटनी को पानी में मिलाकर पिएं।

७५. डेंगू बुखार होने पर 1 गिलास पानी में थोड़ी गिलोय पीस लें। उसमें 5 पत्तियां तुलसी की मिलायें। इसे उबालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े के साथ 3 चम्मच एलो वेरा का रस पानी में मिलाकर पीने से आप रोग मुक्त रह सकते हैं। इस काढ़े में 3 पपीते के पत्तों का रस मिलाकर देने से रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ती है। यह डेंगू में सफल उपाय है।

७६. मलेरिया होने पर गरम पानी में नींबू निचोड़कर पीने से फ़ायदा मिलता है।

७७. चोट लगने पर पहले उसे गोमूत्र से साफ़ करें और फिर उस पर हल्दी की पट्टी बांधें। हल्दी के एंटीसेप्टिक गुण घाव भरते हैं।

७८. कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए दादी माँ के घरेलू नुस्खे कहते हैं कि अंकुरित दालें खानी चाहिए।

७९. महिलाओं को पीरियड्स, मासिक धर्म, माहवारी या रजोनिवृत्ति में होने वाले दर्द से आराम पाने के लिए हल्दी वाला दूध पीना चाहिए। इससे शरीर में गर्मी बढ़ती है और दर्द में आराम होता है।

नस और हड्डियों की समस्या का इलाज

८०. टूटी हड्डी जोड़ने के लिए आपको दूध और दूध से बनी चीज़ों जैसे पनीर और खोये का सेवन करना चाहिए।

८१. अगर किसी को लकवा मार जाये तो उसे तुरंत 50-100 ग्राम तिल का तेल गरम करके पिलाएं और लहसुन चबाने को दें।

८२. अधकपारी यानि माइग्रेन में आधे सिर में असहनीय दर्द होता है। इस दर्द से छुटकारा पाने के लिए आपको उस ओर के नाक के छेद यानि नासिका छिद्र में गाय की घी डालना चाहिए। इससे लाभ मिलेगा।

८३. गर्दन पर सर्वाइकल का दर्द होने पर एक पोटली में अजवाइन बांधें और तवे पर गरम करके दर्द वाले भाग की सेंकाई करने लाभ होगा।

८४. लहसुन के तेल में हींग और अजवाइन पकालें। इस तेल से जोड़ों की मालिश करने से दर्द चला जाता है।

८५. घुटनों और जोड़ों का दर्द होने पर अश्वगंधा, आमलकी और शतावरी का चूर्ण अच्छे से मिलाकर प्रतिदिन सुबह पानी के साथ फांकें। इससे दर्द ख़त्म हो जाएगा और जोड़ मजबूत बनेंगे। गठिया रोग भी ठीक हो सकेगा।

८६. गेहूँ के ज्वारे का रस जिसे व्हीटग्रास जूस कहा जाता है। कैंसर के बचाव में कारगर दवा मानी गई है। इसे पीने के बड़े फ़ायदे हैं।

८७. गर्मी में सिर दर्द होने पर नारियल तेल से मालिश करें। इससे न केवल सिर को ठंडक मिलेगी बल्कि सिर का दर्द भाग जाएगा।

८८. कमर दर्द, स्लिप डिस्क होने पर 1/2 चम्मल गूगल गरम पानी के साथ दिन में दो बार लें। इस उपाय को करते ही दर्द में आराम मिलेगा।

८९. भिंडी में कैंसर से बचाव के लिए एंटी ऑक्सीडेंट की मात्रा काफ़ी अधिक होती है। यह कैंसर कोशिकाओं को फैलने से रोकता है।

९०. गैस, जोड़ों का दर्द और शरीर टूटने पर 1 चम्मच गिलोय का चूरन घी के साथ खाने से लाभ मिलता है।

९१. ढीले स्तनों की समस्या से निजात पाने के लिए बरगड की छाल के बारीक रेसों को पीसकर उसका लेप बना लें और रोज़ाना रात को सोने से पहले इस लेप से स्तनों की मालिश करें। इस उपाय को करने से कुछ ही दिनों ढीलापन समाप्त हो जाएगा।

बालों की देखभाल

९२. बालों का गिरना और झड़ना रोकने के लिए नारियल तेल में नींबू का रस मिलाकर हल्के हाथों से बालों की मालिश करें। ऐसा करने से बाल मुलायम और रूसी मुक्त भी हो जाएंगे।

९३. नीम और बेर के पत्ते पीसकर बालों का मसाज करें। फिर थोड़ी देर बाद सिर धो लें। इससे बाल लम्बे और सुंदर होते हैं।

९४. गंजेपन से छुटकारान पाने के लिए 5 चम्मच दही में 1 चम्मच नींबू का रस और 2 काले चने का पाउडर मिलाकर इसे 1 घंटे तक सिर पर लगाये रखें। फिर उसके बाद सिर को धो लें। ऐसा हफ़्ते में 3 बार करें।

कान की देखभाल

९५. कान में कीड़ा चाल जाए तो सरसों का तेल कान में डाल दें। इससे कीड़ा बाहर निकल आएगा।

९६. गुलाब के इतर 1-2 बूँद कान में डालने से कान का दर्द चला जाता है।

९७. कान में दर्द हो तो आम के पत्तों को पीसकर रस निकाल लें और हल्का गुनगुना कर लें। इसकी 2-3 बूँद कान में डालने से दर्द चला जायेगा।

मोटापा घटाने के उपाय

९८. पेट की चर्बी और मोटापा कम करने के लिए रोज़ सुबह ख़ाली पेट 1 गिलास गुनगुना पानी 1 नींबू निचोड़कर पीना चाहिए। दिन में एक बार लेमन टी भी पीनी चाहिए।

९९. मोटापा कम करने के लिए अपने भोजन में मिर्च, ग्रीन टी, सूखे मेवे और हल्दी को शामिल कीजिए।

१००. ग्रीन कॉफ़ी के सेवन करके 1 महीने में 2 किलो से अधिक वज़न कम किया जा सकता है।

१०१. भूख कम करने के लिए दादी माँ के घरेलू नुस्खे कहते हैं कि खाने में हरी और काली मिर्च का सेवन करना चाहिए। मिर्च भूख कम करती है, जिससे मोटापा घटाने में मदद मिलती है।

शारीरिक और मानसिक देखभाल

१०२. रोज़ सुबह किसी डाल या लोहे की छड़ से लटकने पर लम्बाई बढ़ती है।

१०३. लंबाई बढ़ाने के लिए हमेशा पीठ सीधी करके बैठें और सीना तानकर चलें। बैठते और चलते हुए आपकी कमर सीधी रहनी चाहिए। सही तरीक़े से चलना और बैठना लंबाई बढ़ाने के लिए बहुत आवश्यक है।

१०४. मोटा होने और वज़न बढ़ाने के लिए डाइट चार्ट बनाने के साथ योग को जीवन में अपनाएं।

१०५. 100 ग्राम दही में 50 ग्राम अलसी शहद मिलाकर रोज़ सुबह खाने से सेहत बनती है। यह उपाय 1 साल करने से दुबले व्यक्ति मोटे होते हैं। इससे दिमाग़ी कमज़ोरी भी नहीं होती है।

१०६. शरीर को स्वस्थ, चुस्त और फुर्तीला रखने के योग करने से अच्छा कुछ नहीं है। योग शरीर को अंदर और बाहर दोनों से स्वस्थ रखता है। बीमारियों से बचने के लिए भी योग उत्तम उपाय है।

१०७. दिमाग़ तेज़ करने और याददाश्त बढ़ाने के लिए रात की भीगी दाल को पीसकर इसमें मिश्री मिला लें और दूध के साथ खायें। जिन छात्रों का मन पढ़ाई में न लगता हो या याद करने में परेशानी हो, उनके लिए यह उपाय लाभकारी है।

१०८. शरीर को स्वस्थ रखने के लिए ज़रूरी है कि बॉडी को डिटॉक्स (शरीर का विषैले तत्व बाहर) करने वाले फल और सब्ज़ियां खाएं।

१०९. लौंग का उबला हुआ पानी पीने से बार बार प्यास लगना कम हो जाता है।

सर्दी और खांसी का उपचार

११०. गर्म दूध में हल्दी डालकर पीने से पुरानी खांसी ठीक हो जाती है।

१११. सर्दी ज़ुकाम में तुरंत आराम पाने के लिए दिन में 2 बार शहद के साथ अदरक का सेवन करें।

११२. खांसी और कफ की समस्या दूर करने के लिए अजवाइन के पानी की भाप लें।

११३. गले के इंफ़ेक्शन के लिए शहद का प्रयोग करें।

११४. गले में टांसिल, खांसी, ख़राश और कोई अन्य इंफ़ेक्शन होने पर हल्दी प्रयोग करें। आधा चम्मच कच्ची हल्दी का रस गले में डालें और कुछ देर मुँह बंद रखें। मुँह की लार के साथ ये रस गले में जाने लगेगा और आराम हो जाएगा।

गर्भवती महिला के लिए टिप्स

११५. गर्भवती महिला को नार्मल डिलवरी करनी हो तो चलना फिरना बेहद ज़रूरी है। जितना शारीरिक रूप से एक्टिव होंगे, उतना फ़ायदा मिलेगा।

११६. गर्भ धारण के बाद शारीरिक मांस पेशियों को मजबूत रखने के लिए हल्का व्यायाम और योग ज़रूरी है। इससे प्रजनन के समय बच्चे को जन्म देने में आसानी होगी।

यौन समस्याओं का इलाज

११७. ब्राह्मी के पत्तों को पीसकर दूध के साथ सेवन करने से स्वप्नदोष और पेशाब की समस्या दूर होती है।

११८. अनार के छिलकों का चूर्ण पानी के साथ सेवन करने से स्वप्नदोष दूर होता है।

११९. तांबे के बर्तन में रखा हुए एक रात का बासी पानी पीने स्वप्नदोष नहीं रहता है।

१२०. अगर आपको रात में नींद नहीं आती है तो सोने से पहले एक गिलास गरम दूध में शहद मिलाकर पिएं। इससे अनिद्रा की समस्या चली जायेगी। सोने से पहले चाय या कॉफ़ी का सेवन क़तई न करें।

१२१. स्वप्नदोष से परेशान हैं तो रोज़ 2 लहसुन की कच्ची कलियां खाने से फ़ायदा होगा।

१२२. मन पर नियंत्रण करने के लिए सुबह उठकर ध्यान करें और अच्छी अच्छी किताबें पढ़ें।

१२३. मर्दाना कमज़ोरी हो या फिर नपुंसकता, 1 चम्मच शहद में 1 चम्मच आंवला चूरन और 2 चम्मच आंवले का रस मिलाकर दिन में 2 बार लें। इस नुस्खे से यौन शक्ति बढ़ती है।

आयुर्वेदिक उपचार के लिए आवश्यक बातें

– बासी मांस न खाएं
– मछली और दूध एक साथ न खायें
– भोजन में हरी सब्ज़ियां और दालों का सेवन करें।
– रात को फल न खाएं।
– खाना खाते समय क्रोध त्याग दें।
– दही और मूली का एक साथ न खायें।
– लौकी और उरद दाल एक साथ न खायें।
– कब्ज़ से बचें, तली भुनी चीज़ों से परहेज़ करें।
– रोग और शत्रु को छोटा न समझें।
– सुबह शाम टहलने की आदत रखें।
– गर्म दूध, चाय और कॉफ़ी पीकर तुरंत न सोयें।
– बच्चों के सामने अश्लील और अभद्र बातें न करें।
– सूरज की ओर मुँह करके पेशाब न करें।
– गर्भवती औरत के साथ सहवास न करें।
– बूढ़ी औरत के साथ सहवास न करें।