गर्मी के बाद बारिश की शुरुआत कई रोगों को आमन्त्रित करती है। उन कई रोगों में एक रोग डेंगी बुख़ार भी है। भारतीय उपमहाद्वीप में इसे डेंगू के नाम से भी जाना जाता है। भारत में हर साल हज़ारों लोग डेंगी के शिकार होते हैं। अतः ज़रूरी है कि डेंगी के लक्षण और उपचार के विषय में आप सभी को उचित जानकारी हो। ताकि इनके लक्षणों के ज्ञात होने पर सही उपचार किया जा सकें और डेंगू के वायरस से बचा जा सकें। जिससे आप एक स्वस्थ जीवन जी सकें…

डेंगी बुख़ार क्या है? | Dengue Fever

डेंगी एक तरह का इंफेक्शन या एक वायरल बुखार है। जिसे ‘हड्डी तोड़ बुखार’ भी कहा जाता है। अगर इसका सही उपचार न हो, तो यह बुखार डेंगू हेमोरेजिक फ़ीवर और डेंगू शॉक सिंड्रोम में बदल जाता है, जिससे मरीज़ की जान भी जा सकती है। ये चार प्रकार के डेंगीवायरस डी-1, डी-2, डी-3, डी-4 से होता है। यह वायरस दिन में काटने वाले दो प्रकार के मच्छरों एडिज इजिप्टी तथा एडिज एल्बोपेक्टस मच्छर के काटने से फैलता हैं।

डेंगी बुख़ार एडीज इजिप्टी

डेंगू बुख़ार कैसे होता है ?

डेंगू का बुख़ार मादा जाती के मच्छर एडीज इजिप्टी के काटने से होता है। अगर किसी व्यक्ति को यह बुख़ार है और उस व्यक्ति को यह मच्छर काट कर उसका खून पीले तो उस मच्छर में डेंगी वायरस चला जाता है। जब यह संक्रमित मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काट लेता है तो डेंगू वायरस उस स्वस्थ व्यक्ति में चला जाता है और वह व्यक्ति इस रोग का शिकार हो जाता है।

एडीज इजिप्टी मच्छर । Aedes Aegypti

ये मच्छर दिन के समय अधिक सक्रिय होते हैं। इन मच्छर के शरीर पर चीते जैसी धारियाँ होती हैं। ये ठंडे, अंधेरे और छाया वाले स्थानों पर रहना पसंद करते हैं। घर के अन्दर रखे हुए स्थिर पानी में प्रजनन करते हैं। साथ ही साथ ये गटर और नालियों के पानी में पनपते हैं। इनकी पहुँच प्रजनन क्षेत्र के आस पास लगभग 200 मीटर तक होती है। प्रजनन क्षेत्र में पानी सूख जाने के बाद भी इनके अंडे 12 महीनों तक जीवित रह सकते हैं।

डेंगी बुख़ार के लक्षण

डेंगी बुख़ार संक्रमित मच्छर के काटने के 3 से 14 दिनों में आने लगता है। इसके लक्षण जैसे तेज़ बुख़ार, सिरदर्द, कमर व जोड़ों में दर्द, आँखों में दर्द, थकावट व कमज़ोरी, भूख कम लगना, हल्की खाँसी व गले में खराश, उल्टी व शरीर पर लाल-लाल दाने आदि लक्षण दिखाई देते हैं। शरीर पर दाने इस बुखार में दो बार भी दिखाई दे सकते हैं। डेंगू हेमोरेजिक बुखार में उपरोक्त लक्षणों के अलावा प्लेटलेट्स की कमी से शरीर में कहीं से भी ख़ून बहना प्रारम्भ हो सकता है, जैसे नाक से, दाँतों व मसूड़ों से, खून की उल्टी व मल में खून आना आदि। इसके साथ मरीज के हाथ-पाँव ठंडे हो सकते हैं या उपचार के अभाव में उसकी मृत्यु हो सकती है।

डेंगी बुख़ार से बचाव

1. डेंगी बुख़ार के इलाज में लाक्षणिक चिकित्सा (Symptomatic Treatment) दी जाती है। इसके लिए अभी तक कोई दवा या वैक्सीन नहीं बनाई जा सकी है।

2. डॉक्टर की सलाह पर तेज़ बुखार व दर्द निवारक दवाई जैसे पेरासिटामॉल ले सकते हैं। लेकिन इसके अलावा अन्य दर्द निवारक दवाई जैसे एस्प्रिन का उपयोग कभी नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह रोगी के लिए घातक भी हो सकता है। इससे शरीर में कहीं से भी ख़ून का स्राव शुरू हो सकता है।

3. इस अवस्था में रोगी को पर्याप्त मात्रा में आराम, व्यायाम, संतुलित आहार, जूस, नारियल पानी और पानी को लेना चाहिए। जिससे हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत हो और हमारा शरीर डेंगी बुख़ार से लड़ने में सक्षम हो।

5. समय-समय पर प्लेटलेट्स काउंट की जाँच कराते रहें और डॉक्टरी सलाह के अनुसार ही चलें।

4. घर के अन्दर, बाहर और आस-पास के स्थानों पर पानी जमा न होने दें। अगर किसी भी खुली जगह में जैसे की गड्डों में, गमले में या अन्य जगह पर पानी जमा है तो उसमें मिट्टी डाल दें।

5. घर में कीटनाशक दवा का छिड़काव करायें।

6. कूलर का प्रयोग न करने पर इसके पानी को निकालकर सुखा कर इसे रख दें। यदि कूलर का उपयोग कर रहें हो तो कूलर का पानी नियमित रूप से बदलते रहें।

7. खिड़की और दरवाज़े में जाली लगाकर रखें। शाम होने से पहले दरवाजे बंद कर दें।जिससे मच्छरों से बचाव हो सकें।

8. ऐसे कपड़े पहने जो आपके पूरे शरीर को ढ़क कर रखें।रात को सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें।

तो डेंगी बुख़ार से बचने के लिए उपर्युक्त उपायों को अपनाएं और एक स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।