लोग आज भी मानसिक रोग जैसे डिप्रेशन के बारे में उतने सजग नहीं हैं जितना कि होने की आवश्यकता है। अनेक ऐसे मामले हैं जिनमें इसे मन का भ्रम मानकर लोग इसे गम्भीरता से नहीं लेते हैं। अगर आप अपनों के बारे में तनिक भी चिंता करते हैं तो आप अवसाद के लक्षण स्वयं पहचान सकते हैं, ताकि उनकी सही समय पर सहायता कर सकें।

डिप्रेशन की पहचान

डिप्रेशन के सामान्य लक्षण

1. थकान

जब व्यक्ति अंतर्मन से दुखी होता है तो उसके स्वाभाव में भी निरसता आ जाती है, जिससे वो थका थका सा रहने लगता है। डिप्रेशन के मरीज़ ख़ुद को बहुत थका हुआ महसूस करते हैं, कोई भी काम ठीक से नहीं कर पाते हैं।

2. अनिद्रा

अवसाद कई प्रकार होते हैं, जिनमें नींद के कई पैटर्न होते हैं। इस बीमारी में कुछ लोग अनिद्रा के शिकार हो जाते हैं वहीं कुछ लोगों को अधिक नींद आने लगती है।

3. पीठ का दर्द

मेरुदंड या रीढ़ की हड्डी हमारे कमर के ऊपर के भाग को संभालती है। अधिक मानसिक तनाव के कारण पीठ का दर्द शुरु हो जाता है। साथ डिप्रेशन के रोगी को सिर दर्द की समस्या भी पकड़ लेती है, जिस पर दवाओं का असर नहीं होता है।

पीठ का दर्द

4. चिड़चिड़ापन

स्वाभाव में चिड़चिड़ापन अगर आदत सा बन जाए तो इसे गम्भीरता से लेने की आवश्यकता है। बजाय की हम रोगी से लड़े या उसके प्रति सहानुभूति दिखाएँ, उसके पीछे का वास्तविक कारण खोजना और सही इलाज देना सर्वोत्तम है।

5. एकग्रता की कमी

मानसिक तनाव डिप्रेशन को जन्म देता है, ऐसे में रोगी का मस्तिष्क इधर उधर की बातें ज़्यादा सोचने लगता है जिससे महत्वपूर्ण कामों में एकग्रता की कमी दिखने लगती है। साथ ही व्यक्ति छोटी छोटी बातें भूलने लगता है।

6. क्रोध

चिड़ाचिड़ापन क्रोध से अलग होता है। अवसाद और तनाव में व्यक्ति दूसरों पर क्रोध करने के साथ स्वयं पर भी जल्दी ग़ुस्सा हो जाता है। ऐसे भी मरीज़ को इमोशनल सपोर्ट की आवश्यकता होती है। इसलिए उसकी मनोस्थिति जानने का प्रयास करें।

7. डर

डिप्रेशन का रोगी किसी के समझाने से नहीं समझता है, उसके मन में जो बात घर कर जाती है वह उसे ही सच मानता है। ऐसे में अगर उसके अंदर किसी तरह का डर पैदा हो जाए जैसे अंधेरे से, बंद कमरे से, ऊँचाई से, अजनबी लोगों से, बाहर आने जाने से, गाड़ी चलाने से या और कुछ तो इसके लिए मनोचिकित्सक की सलाह आवश्यक हो जाती है।

डर भय

8. अपच

जिस तरह बचपन में बच्चों का एक्ज़ाम के डर से पेट ख़राब हो जाया करता है, उसी तरह एक अवसाद से ग्रसित व्यक्ति का भी पेट ख़राब रहता है और उसे अपच की समस्या बनी रहती है।

9. काम उत्तेजना की कमी

अक्सर शीघ्र पतन पुरुषों में आम बात है। लेकिन जब वह बार बार अपने साथी की काम इच्छाओं की पूर्ति न कर पाए तो अवसाद उसे घेर लेता है। ऐसे में वह आपने साथी से तरह तरह के बहाने बनाकर दूर रहता है।

10. नकारात्मक विचार

डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति नकारात्मक विचारों से प्रभावित रहते हैं, ऐसे में वो दूसरों को या स्वयं को नुक़सान पहुँचाने की सोच सकते हैं। वह नींद में भी इन विचारों से बच नहीं पाता है और वो ये सपने न देखे इसके लिए वह सोता नहीं है।

अब जब आप ऐसे किसी व्यक्ति से मिलें तो उससे इमोशनल बॉडिंग बनाएँ ताकि वह आपसे अपनी हर बात शेअर करे। साथ ही स्थिति में जल्दी सुधार के लिए आवश्यक है कि आप डॉक्टरी सलाह लें और वह जो दवाइयाँ लिखे उसे नियमित रूप से डिप्रेशन के मरीज़ को दें।