ख़ुशी और ग़म जीवन के दो पहलू हैं। कभी हम ख़ुशी के आँचल में हँसते हैं तो कभी ग़म के वीराने में ख़ुद को अकेला महसूस करते हैं। लेकिन हममें से अधिकांश लोग ग़म के वीराने से आगे निकल जाते हैं और ख़ुद को ख़ुश रखने के नये बहाने ढूँढ लेते हैं जो लोग ऐसा नहीं कर पाते वे गहरे, लम्बे और कहीं ज़्यादा दुखद डिप्रेशन / अवसाद का शिकार हो जाते हैं। आइए जानने का प्रयास करते हैं कि डिप्रेशन क्या है , किसे होता है और दवाओं की क्या भूमिका है।

डिप्रेशन क्या है

डिप्रेशन के कारण लोगों अपनी ज़िंदगी में ख़ुशनुमा महौल से मुँह मोड़ लेते हैं वो ख़ुद को दूसरों से अलग-थलग कर लेते हैं और रोज़मर्रा के कामों में अपना दिल नहीं लगा पाते हैं। अपने ही ग़म की दुनिया में खो जाते हैं।

डिप्रेशन के कारण

डिप्रेशन क्या है और इसके होने की सही-सही वजह कोई डॉक्टर या साइकोलॉस्जिस्ट नहीं बता सकता है, लेकिन शोध बताते हैं कि डिप्रेशन एक या कई कारणों का प्रभाव के रूप में सामने आ सकता है।

डिप्रेशन क्या है

अक्सर डिप्रेशन लोगों को ख़ुद को अकेला महसूस करने के कारण होता है। अकेलापन महसूस करने के कई कारण हो सकते हैं। किसी अपने मृत्यु, नौकरी छूट जाना, शादी टूट जाना, जीवन में असफलता, बुरा होने की सम्भावना का बार-बार विचार आना आदि प्रमुख कारण हैं, जो अधिकांश मामलों में सामने आते हैं।

कुछ बॉयोलॉजिकल कारणों से भी डिप्रेशन की काली छाया किसी भी व्यक्ति पर छा सकती है, जैसे थॉयराइड का कम बनना। कुछ एक मामलों दवाओं का साइडइफ़ेक्ट भी अवसाद का कारण बन जाता है। उच्च रक्तचाप / ब्लड प्रेशर कम करने की कुछ दवाओं के साइडइफ़ेक्ट के तहत डिप्रेशन होने की सम्भावना रहती है।

डिप्रेशन के लिए सामाजिक कारण भी हो सकते हैं। जिससे ये धीरे-धीरे आपके दिमाग़ पर कब्ज़ा कर लेता है और आप अपना आत्मविश्वास खोते जाते हैं।

आपके मस्तिषक में मौजूद केमिकल्स की अवसाद के लिए किस प्रकार से जिम्मेवार हैं इस पर अभी भी शोध चल रहा है और इसके कारण को साबित करने वाला कोई पुख़्ता सबूत नहीं मिला है। दुनिया भर के विशेषज्ञ मानते हैं कि मस्तिष्क में रसायनों का असंतुलन ही अवसाद का एक मात्र कारण नहीं है, इसके लिए और भी कई फ़ैक्टर जिम्मेवार होते हैं।

अवसाद किसे होता है

डिप्रेशन किसी भी व्यक्ति को हो सकता है। नये अनुसंधान बताते हैं कि डिप्रेशन अनुवांशिक भी होता है यदि माता-पिता में से किसी एक को डिप्रेशन की समस्या हो तो डिप्रेशन की सम्भावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है। आपके जींस / गुणसूत्र ३ में होने वाले बदलावों के कारण विश्वभर में लगभग ४ प्रतिशत लोग अवसाद के शिकार बनते हैं।

अवसाद या डिप्रेशन क्या है

दवाओं की भूमिका

डिप्रेशन क्या है और इसके कारण जानने के बाद हम इस बीमारी में दवाओं की भूमिका के बारे में जानते हैं।

किसी व्यक्ति के मस्तिष्क में मौजूद रसायन पर एंटी-डिप्रेशन की दवाएँ काम करती हैं जिससे डिप्रेशन पर क़ाबू पाया जा सकता है। लेकिन कई बार एंटी-डिप्रेसेंट्स दवाएँ डिप्रेशन के लिए कारगर नहीं होती हैं। न्यूरांस यानि मस्तिष्क की कोशिकाओं के बीच सम्पर्क बनाने वाले न्यूरोट्रांसमिटर्स भी अवसाद के चलते बिगड़ जाते हैं। जिससे एक न्यूरोट्रांसमिटर द्वारा भेजे गये संदेश ग्रहण करने वाला न्यूरॉन ग्राही किसी निश्चित न्यूरोट्रांसमिटर संदेश के प्रति अधिक संवेदनशील या असंवेदनशील हो सकता है।

डिप्रेशन क्या है और इसकी दवा

एंटी-डिप्रेशन दवाएँ मूड बदलने वाले न्यूरोट्रांसमिटर्स जैसे सेरोटॉनिन, नॉरपाइनफ़्राइन और डेपामाइन का लेवल धीरे-धीरे बढ़ाता है। यह लेवल अचानक से नहीं बढ़ाया जा सकता है इसलिए कुछ हफ़्तों तक ये दवाएँ खाने के बाद ही इनका असर दिखता है।

सन्‌ १९५० से अब तक हमारे पास ४ चार तरह के एन्टी-डिप्रेसेंट दवाएँ हैं जो मस्तिष्क पर अलग-अलग तरह से काम करते हैं। सबसे आम एंटीडिप्रेसेंट अवसाद ख़त्म करने के लिए सेरोटॉनिन और नॉरएड्रीनेलिन; और नये एंटीडिप्रेसेंट नॉरपाइनफ़्राइन पर काम करते हैं।

एंटीडिप्रेसेंट दवाएँ डिप्रेशन के कुछ लक्षणों में आरामदेह साबित होती हैं लेकिन डिप्रेशन की जड़ पर काम नहीं करते हैं। यही वजह है कि एंटीडिप्रेसेंट दवाएँ डिप्रेशन पैदा करने वाले कारणों का इलाज करने वाली दवाओं के साथ दी जाती हैं।

डिप्रेशन के लक्षण और बचाव के तरीके