बदलता मौसम हमारे शरीर को बेहद प्रभावित करता है। जैसे जैसे गर्मी बढ़ती जायेगी, वैसे वैसे कई रोग जैसे लू, डायरिया या अतिसार, घमौरी, पेट सम्बन्धी आदि रोग मानव शरीर को घेरे रहेंगे। ऐसे में ज़रूरी है कि गर्मियों में बाहर के दूषित खाने से बचें क्योंकि इसके इस्तेमाल से पेट में इंफ़ेक्शन हो सकता है। पेट के इस इंफ़ेक्शन को गैस्ट्रोइंटराइटिस या समर फ्लू कहते हैं। ऐसा होने पर रोगी को बार – बार उलटी , दस्त , पेट दर्द , शरीर में दर्द या बुखार भी हो सकता है।

अतिसार गैस्ट्रोइंटराइटिस का ही रूप है। इसमें अक्सर उलटी और दस्त दोनों होते हैं, लेकिन ऐसा भी मुमकिन है कि उलटियां न हों, पर दस्त हो रहे हों। यह स्थिति बेहद खतरनाक है। साधारण भाषा में कहें तो एक बार दस्त का मतलब है क़रीब एक गिलास पानी की कमी। इस तरह डीहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी हो सकती है। जो शरीर के लिए बेहद घातक है।

डायरिया के प्रकार

अतिसार तीन प्रकार का होता है – 1. वायरल , 2. बैक्टीरियल और  3. प्रोटोज़ोअल

पहला वायरस से होता है। जो ज़्यादातर छोटे छोटे बच्चों में होता है। यह कम ख़तरनाक होता है। जबकि दूसरा बैक्टीरिया से और तीसरा अमीबा से होता है। ये दोनों ज़्यादा घातक हैं।

डायरिया के लक्षण

डायरिया के लक्षण

अतिसार या निर्जलीकरण (Dehydration) के प्रारंभिक लक्षणों में मुंह, गले तथा आँखों में सूखापन, गाढ़े रंग का मूत्र, थकान और चक्कर आदि हैं।

अगर अतिसार होने पर तेज़ बुखार हो, पेशाब कम हो रहा हो और मल के साथ ख़ून या पस आ रहा है तो बैक्टीरियल या प्रोटोज़ोअल डायरिया हो सकता है। बैक्टीरियल इंफ़ेक्शन में एंटीबायोटिक और प्रोटोज़ोअल इंफ़ेक्शन में एंटीअमेबिक दवा दी जाती है।

डायरिया से बचाव के कुछ उपाय

1. अतिसार होने पर शरीर में पानी की कमी हो जाती है इसलिए अधिक से अधिक पानी पिएं। पानी का सेवन करने से निर्जलीकरण नहीं होगा। इसलिए नमक के छोटे-छोटे टुकड़े चूसकर खाएं। नमक और पानी का घोल बनाकर प्रयोग करें। लेकिन बाहर का पानी पीने से बचें। घर का साफ़ और उबला पानी पिएं। हैंडपम्प का पानी न पिएं।

2. डायरिया होने पर शरीर के अंदर से तरल लवण बाहर निकलते हैं। इनकी कमी को पूरा करने के लिए ओआरएस (ORS) का घोल बनाकर पिएं।

3. अतिसार होने पर बाहर का तला भुना और मसाले वाला खाना व बासी खाने से परहेज़ करें। सदैव घर का बना ताज़ा खाना ही खायें।

4. खाने की चीज़ों को अच्छी तरह से धोकर पकाएं।

5. डायरिया होने पर भोजन बिलकुल बंद न करें। बल्कि चावल, केला व सेब के मुरब्बे का सेवन करें। खाने से पहले और बाद में साबुन से हाथ धोकर तब आहार का सेवन करें।

6. अतिसार के उपचार में चावल बहुत फायदेमंद है। चावल आंतों की गति को कम करके दस्त को बांधता है।

7. यदि आपको डायरिया एंटीबायोटिक खाने की वजह से हुआ हो तो दही का अधिक से अधिक सेवन करें। क्योंकि दही में उपस्थित प्रो-बायोटिक एक प्रकार के जीवंत बैक्टीरिया होते हैं, जो आपके पाचन प्रणाली को सुचारू रूप से चलाते हैं। दही खाने पर ये बैक्टीरिया आँतों में पुनः स्थापित होकर अतिसार (दस्त) के प्रवाह को रोकते हैं।

8. डायरिया में गोभी , आलू जैसी सब्ज़ियों का सेवन करने के बजाय भिंडी , लौकी आदि मौसमी सब्ज़ियों को खाएं।

9. संतरा , अंगूर , तरबूज , ककड़ी जैसे मौसमी फल खाएं।

10. डायरिया में नींबू पानी , आम पना , बेल या गुड़ का शरबत आदि का सेवन बहुत फ़ायदेमंद है।

11. अदरक का सेवन करने से अतिसार में राहत मिलती है। अदरक की चाय पीने से पेट की तकलीफ़ कम होती है। अदरक का रस, नींबू का रस और काली मिर्च का पाउडर पानी में मिलाकर पीने से राहत मिलती है।

12. डायरिया होने पर दूध और उससे बनी हुई चीज़ों का प्रयोग न करें। क्योंकि दूध या उससे बने हुए खाद्य पदार्थ आसानी से पच नहीं पाते।

13. डायरिया होने पर पेट में मरोड़ की समस्या होने लगती है। इससे जल्द छुटकारा पाने के लिए पेट की तनावयुक्त मांसपेशियों को गर्म पानी की थैली या किसी हीटिंग पैड से सेंक दें।

14. डायरिया में किसी भी प्रकार की तकलीफ़ होने पर शरीर को पूरा आराम देना अत्यधिक ज़रूरी है। क्योंकि आराम करने से शरीर को अतिसार के किसी भी वायरस से लड़ने की शक्ति मिलती है।

डायरिया की गम्भीर स्थिति होने पर चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

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