ज़रा-सी सर्दी, जुकाम और बुखार होने पर बिना डॉक्टर की सलाह लिए एंटी बायोटिक खाना आपके पेट, लीवर और किडनी के लिए घातक हो सकता है। लोहिया अस्पताल के सीनियर फिजिशन डॉ० संदीप चौधरी ने बताया कि लंबे समय तक बिना डॉक्टर की सलाह के एंटी बायोटिक खाने वालों पर धीरे-धीरे दवाओं का असर ही ख़त्म हो जाता है।

लखनऊ के अस्पतालों में नवम्बर का तीसरा सप्ताह फ़ॉर्मेसी वीक के तौर पर मनाया गया। इस बार आयोजन की थीम ‘रिस्पांसिबल यूज़ ऑफ एंटी बायोटिक : सेव लाइव’ रही। इंडियन फ़ॉर्मास्यूटिक असोसिएशन के महामंत्री राम अवतार गुप्ता ने बताया कि बिना जरूरत एंटीबायोटिक खाने से किडनी, गला और लीवर समेत अंगों के भीतरी हिस्से की चिकनाई भी ख़त्म हो जाती है। इसके कारण एसिडिटी, भूख न लगना, शरीर में कोई न कोई परेशानी बने रहना और कब्ज़ जैसी दिक्कतें बनी रहती हैं। बलरामपुर अस्पताल के न्यूरो फिजिशन डॉ० मनोज अग्रवाल के मुताबिक ज़्यादा एंटी बायोटिक खाने वाले मरीजों पर दवाओं का असर ख़त्म हो जाता है।

एंटी बायोटिक दवा

एंटी बायोटिक दवा के नुक़सान

ये नुकसान हो सकते हैं

• भोजन पचाने वाले लाभदायक बैक्टीरिया नष्ट होने से कब्ज़ की शिकायत।
• लीवर, किडनी और दूसरे अंगों में दिक्कतें।
• हड्डियाँ कमज़ोर हो सकती हैं।
• जीभ में खाने का स्वाद ख़त्म हो सकता है।
• दाँतों का रंग बदलने के साथ मसूड़ों के फैलने का ख़तरा।
• शरीर के स्वाभाविक प्रतिरोधक तंत्र को नष्ट कर सकता है।

कब लें एंटी बायोटिक

दवा का डोज़ क्या होगी? कितने समय तक सेवन करना है? मरीज की उम्र क्या है? वज़न कितना है? कितने समय से बीमार है? इन तमाम सवालों का जवाब पाने के बाद एक डॉक्टर तय करता है कि मरीज को कौन सी एंटी बायोटिक और कितने डोज की दवा देनी है। यह तय करते समय डॉक्टर इस बात का ख़याल रख़ता है कि इसके सेवन से शरीर के भीतर लाभदायक बैक्टीरिया को कम से कम नुकसान पहुँचे। वहीं डॉक्टर की सलाह के बिना एंटी बायोटिक लेने से इसके ओवर डोज़ या अंडर डोज़ होने की आशंका होती है। ओवर डोज़ से जहाँ शरीर के अंगों को नुकसान पहुँचता है, वहीं अंडर डोज़ से रोगी मुसीबत में पड़ सकता है।