अक्सर मिर्गी रोग होने पर लोग घबरा जाते हैं और सोच में पड़ जाते हैं कि वो क्या करें या क्या न करें। मिर्गी का दौरा पड़ने पर कुछ लोग तो रोगी को जूता सुंघाने लगते हैं, जबकि ऐसा आप बिलकुल भी न करें। आज हम आपको मिर्गी रोग से जुड़ी कुछ ख़ास बातों को बताने जा रहे हैं। मस्तिष्क की विद्युत तरंगों के अत्यधिक मात्रा में बढ़ने व फैलने से शरीर में होने वाली क्रमिक गति, संवेदी व अन्य परिवर्तनों को मिर्गी का दौरा कहते हैं। ऐसा बार बार होने की प्रवृत्ति को मिर्गी रोग “Epilepsy” कहते हैं। आमतौर पर मिर्गी दौरे की अवधि कुछ क्षणों से होकर 4 से 5 मिनट तक हो सकती है। लेकिन कभी कभी दौरा लम्बे समय तक का भी हो सकता है या फिर दौरे लगातार एक के बाद एक करके लगातार भी पड़ सकते हैं। जो कि रोग की गम्भीर अवस्था स्टेट एपिलेप्टिकस “State Epilepticus” मानी जाती है।

मिर्गी रोग - Epilepsy

मिर्गी रोग के लक्षण

  1. आंख या शरीर का कोई एक हिस्सा फड़कना या एकटक देखते हुए गुमसुम हो जाना यह इसका शुरुआती लक्षण हैं।
  2. पूर्ण मिर्गी के दौरे में रोगी यदि बैठा हो या खड़ा हो तो गिर जाता है, उसकी तेज़ चीख निकल सकती है।
  3. इसमें आंखे ऊपर घूम जाती हैं। शरीर कड़ा हो जाता है और फिर पूरे शरीर में रुक रुककर कपकपी होती रहती है।
  4. सांस रुक रुककर चलती है और पूरा शरीर नीला पड़ सकता है। मुंह से फेना भी निकल सकता है। बाद में शरीर ढीला पड़ जाता है।
  5. रोगी को कुछ समय तक अपने और अपने आसपास का ज्ञान भी नहीं रहता है तथा पूछने पर सही उत्तर भी नहीं दे पाता है।
  6. रोगी को सिर दर्द और उल्टी भी महसूस हो सकती है। हाथ, पैर और चेहरे की मांसपेशियों में खिंचाव भी महसूस हो सकता है।

मिर्गी रोग में क्या करें

  1. संयम और धैर्य से काम लें।
  2. रोगी यदि बैठा या खड़ा हो तो उसे समतल जगह पर लिटा दें, यदि बिस्तर मौजूद हो तो उस पर लिटायें, ताकि रोगी के शरीर को किसी भी प्रकार की रगड़ या चोट से बचाया जा सके। सिर के नीचे कोई कपड़ा या तौलिया लगा दें।
  3. रोगी के आसपास यदि कोई नुकीली या धारदार या गर्म वस्तु हो तो हटा दें।
  4. यदि रोगी ने टाइट कपड़े या टाई पहनी हो तो उसे ढीला कर दें।
  5. दौरे में हो रहे शारीरिक परिवर्तनों को ध्यान से देखें, इनका विस्तृत वर्णन डॉक्टर को बताना बहुत आवश्यक है। जिसके आधार पर डॉक्टर रोगी का इलाज कर सकता है।
  6. दौरा समाप्त होने पर रोगी को करवट के बल लिटा दें, जिससे मुंह की लार और फेना स्वतः ही बाहर निकल जाए।
  7. यदि दौरे के बाद रोगी सोना चाहे तो उसे सोने दें।
  8. यदि वो कोई पेय पदार्थ पीना चाहे तो उसे दे सकते हैं। जिससे उसे राहत मिले।

मिर्गी रोग में क्या न करें

  1. ऐसे में रोगी को चमड़े का जूता न सुंघाएं, इसका कोई लाभ नहीं होता बल्कि रोगी को सांस लेने मे रुकावट हो सकती है।
  2. रोगी के चारों ओर भीड़ लगाकर या घेर कर बिल्कुल भी खड़े न हों, बल्कि स्वच्छ हवा आने दें।
  3. मिर्गी के दौरे के समय हाथ पैर के कंपन को बलपूर्वक रोकने की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए ऐसा बिल्कुल भी न करें।

डॉक्टरी परामर्श

  1. मिर्गी का दौरा समाप्त होने पर डॉक्टर के पास जाये और उसकी सलाह लें। यदि यह दौरा पहली बार हुआ हो तो ऐसा करना आवश्यक है।
  2. यदि रोगी को सांस लेने में कोई तकलीफ़ हो रही हो तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
  3. यदि मिर्गी का दौरा तेज़ बुखार में पड़ा हो तो स्पंजिंग कर बुखार को कम करने का प्रयास करें।
  4. डॉक्टरी सलाह के अनुसार रोगी को नियमित दवाई दें, ताकि वो जल्दी स्वस्थ हो सके।

सावधानियाँ

इस रोग के पता लगने पर निम्न सावधानियां बरतें –

  1. भरपूर नींद लें।
  2. संतुलित भोजन करे और तला भुना भोजन का सेवन करने से बचें।
  3. मानसिक थकान या तनाव से दूर रहने की कोशिश करें।

तो इस तरह से मिर्गी रोग के लक्षणों से अवगत होकर इससे रोगी का समय पर उपचार कर उसे प्राथमिक चिकित्सा भी प्रदान कर सकते हैं और सही समय पर सही उपचार देने से एक जीवन को बचाया जा सकता है।

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