ज़्यादा वज़न, फ़ास्ट फ़ूड का चस्का और घंटों एक ही जगह बैठे या खड़े रहना… लखनऊ में इन तीन वज़हों से बड़ी संख्या में बवासीर (पाइल्स) रोगी सामने आ रहे हैं। लोहिया अस्पताल के सीनियर फिजीशियन डॉ संदीप चौधरी बताते हैं कि शुरूआत में इस बीमारी की पहचान नहीं हो पाती लेकिन दिक्कत जटिल होने पर मरीज डॉक्टर के पास आता है। डॉ संदीप के मुताबिक ज़रूरी नहीं कि पाइल्स के हर मरीज को ऑपरेशन ही करवाना पड़े। अब ऐसी दवाएं बाजार में उपलब्ध हैं, जिनके इस्तेमाल से गंभीर हो चुके पाइल्स को भी ठीक किया जा सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हो चुके प्रो० रमाकांत ने बताया कि बवासीर पुरुष और महिलाओं को होने वाली आम बीमारी है। उनके मुताबिक, 50 साल से ऊपर के लगभग 50 फ़ीसद लोगों को जीवन में कम से कम एक बार ऐसी समस्या हो चुकी होती है। यही नहीं 70 वर्ष से ऊपर के 85 फ़ीसदी लोगों को बवासीर से जूझना पड़ता है। डॉ संदीप चौधरी बताते हैं कि ओपीडी में आने वाले ज़्यादातर पाइल्स के मरीज ऐेसे होते हैं जो लम्बे समय तक जानकारी की कमी, शर्म या झिझक के चलते इस बीमारी को झेलते रहते हैं। ऐसा करना घातक हो सकता है।

बवासीर के कारण

Bavasir piles

डॉक्टरी सलाह

बवासीर के लक्षण महसूस होते ही इलाज शुरू करें, यह परेशानी दवाओं से भी दूर हो सकती है

पाइल्स होने के कारण

• मैदे वाली चीजें या फ़ास्ट फ़ूड की लत
• घंटों एक ही जगह खड़े रहने या बैठे रहना
• मोटापा
• नियमित कब्ज़ बने रहना
• परिवार में माता पिता को हो चुका हो

भोजन में अधिक फ़ाइबर, फलों और पानी का पर्याप्त सेवन करने और नियमित व्यायाम की आदत डालने वालों को यह बीमारी कम होती है। – डॉ बीकेएस चौहान, अधीक्षक, बलरामपुर अस्पताल

ख़ून रिसने की अनदेखी न करें

लोहिया अस्पताल के सीनियर फ़िजीशियन डॉ संदीप चौधरी ने बताया कि पाइल्स में एनस के भीतर और बाहरी हिस्से की शिराओं में सूजन आ जाती है। इससे मस्से बन जाते हैं। अगर मल त्याग करते समय ख़ून रिस रहा हो तो उसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए। समय रहते मर्ज पता चलने पर जो बीमारी दवाओं से ठीक हो सकती है, वहीं ज़रा सी लारवाही के कारण सर्जरी की वजह भी बन सकती है।

इन बातों का ध्यान रखें

• ढीले अंडरवेयर पहनें। लंगोट आदि पहनना नुकसानदायक हो सकता है।
• मल त्याग के दौरान जोर लगाने से बचें।
• जीरा भूनकर पिस लें। उसको गुनगुने पानी में मिलाकर काढ़ा बना लें। सोने के पहले रात को रोज इसका सेवन करें।
• टॉयलेट में बैठकर कोई किताब या पेपर पढ़ने की आदत से बचें।
• हो सके तो इंडियन स्टाइल वाले टॉयलेट का ही यूज करें क्योंकि इसमें पेट आसानी से साफ़ हो जाता है।