आज कल प्राकृतिक और घरेलू उपचार पर लोगों का विश्वास बढ़ रहा है। आयुर्वेदिक उपचार की बात चलते ही लोग गिलोय का नाम लेते हैं। आयुर्वेद में इसके कई नाम हैं, जैसे – गुरूच, अमृतवल्ली, गिलो, गुलवेल, गुडूची और मधुपर्णी। इसलिए आज हम गिलोय द्वारा रोगों के उपचार की विधि जानेंगे।

जिस वृक्ष से गिलोय की बेल चढ़ती है, उसके गुण भी सोख लेती है। यही वो कारण जिसकी वजह से नीम पर चढ़ने वाली गुरूच को सबसे अच्छा माना गया है। आज बाज़ार में भी गिलोय चूर्ण, गोलियाँ और सिरप उपलब्ध हैं।

गिलोय के पत्ते
Heart-leaved moonseed

गिलोय का परिचय

गिलोय एक बेल है, जो पेड़ से लिपटकर बढ़ती है। इसके पत्ते पान के पत्तों की तरह दिखते हैं। आप गुरूच को गमले भी उगा सकते हैं, और इसे रस्सी के सहारे बड़ा कर सकते हैं।

– यह एक ऐसी औषधि है जो अनेक शारीरिक रोगों का उपचार करने में समर्थ है।
– गिलोय की बेल के सभी भाग औषधीय गुणों से भरे होते हैं। पत्तों का रस के साथ साथ बेल (तने) का रस भी प्रयोग कर सकते हैं।
– इसमें एंटीबॉयोटिक और एंटीवायरल गुण होते हैं। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
– गुरूच की बेल की जीवन शक्ति इतनी अदभुत है, इसकी बेल का छोटा सा टुकड़ा भी ज़मीन में डाल देने से यह बेल बन जाता हैं।

गिलोय के फ़ायदे

1. रक्त शोधक

रक्त शोधन के लिए गिलोय का रस चमत्कारिक होता है। सुबह सुबह खाली पेट पानी के साथ गुरूच का रस पीने से ख़ून साफ़ रहता है और रक्त संबंधित विकार दूर रहते हैं।

2. कैंसर रोग

गिलोय की जड़ों में बहुत अधिक एंटीऑक्सीडेंट होता है, इसलिए यह कैंसर से बचाव और उपचार में काफ़ी असरदार होती है। अमृतवल्ली की जड़, गेहूँ के ज्वारे का रस, तुलसी और नीम से 5 पत्ते पीसकर पीने से कैंसर सेल्स की ग्रोथ थम जाती है।

3. गठिया रोग

गुलवेल का चूर्ण सोंठ के साथ मिलाकर खाने से गठिया रोग में काफ़ी आराम मिलता है।

4. टॉक्सिंस निकाले

अगर फ़्री रेडिकल्स को शरीर से बाहर निकालना हो तो प्रतिदिन अमृतवल्ली का सेवन करना चाहिए। शरीर डिटॉक्सीफ़ाइ होने बाद आप बीमारियों से बचे रहेंगे।

5. हृदय रोग

हृदय रोग में गिलोय के चमत्कारिक परिणाम नज़र आते हैं। इससे ब्लड में कोलेस्ट्रोल और शुगर लेवल कंट्रोल रखने में मदद मिलती है।

6. वज़न नियंत्रण

वज़न नियंत्रित करने के लिए अमृतवल्ली और त्रिफला चूर्ण को शहद के साथ लेना चाहिए। इसके नियमित सेवन से मोटापा घटाना आसान हो जाता है।

गिलोय की बेल
Giloy ki bel

7. शारीरिक कमज़ोरी

शारीरिक कमज़ोरी लगने पर सप्ताह में 3 दिन शहद के साथ गिलोय का सेवन करने से लाभ मिलता है और कुछ दिनों में शरीर चुस्त दुरुस्त हो जाता है।

8. ख़ून की कमी

ख़ून की कमी दूर करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए गुडूची बहुत लाभकारी है। इसलिए शहद के साथ इसका सेवन कीजिए।

9. बवासीर

1 गिलास मट्ठे के साथ 1 चम्मच चूर्ण सुबह शाम पीने से बवासीर ख़त्म हो जाता है।

10. डेंगी – डेंगू

6 इंच गुडूची बेल, 4 तुलसी के पत्ते, 3 पपीते के पत्ते, थोड़ा साथ एलो वेरा और व्हीटग्रास का जूस बनाकर पीने से शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या तेज़ी से बढ़ती है। डेंगी, चिकेनगुनिया, स्वाइन फ़्लू और बर्ड फ़्लू में यह उपाय रामबाण उपचार है।

11. जलन

अगर हाथ पैरों में जलन रहती हो तो आपको गुलवेल के पत्ते, नीम के पत्ते और आंवले का काढ़ा बनाकर रोज़ 2 से 3 बार पीने से लाभ मिलता है।

12. बुखार

– बुखार का उपचार करने के लिए गिलोय के रस में शहद का रस मिलाकर पीने फ़ीवर उतर जाता है। बुखार के साथ खांसी हो तो पीपल का चूर्ण भी मिला लीजिए।
– टाइफाइड और मलेरिया जैसी बीमारियों में भी गुडूची लाभकारी है।
– पित्त का बुखार उतारने के लिए गुलवेल के रस में खांड मिलाकर पिएँ। पित्त का बढ़ना रोकने के लिए गुडूची के रस भी शहद मिलाकर प्रयोग करना चाहिए। इससे कब्ज़ भी ठीक हो जाता है।

13. दस्त

लूज़ मोशन आ रहा है, तो गुरूच पीसकर पीने वह ठीक हो जाता है। साथ पेट की बीमारियाँ जैसे कब्ज़ और गैस भी ख़त्म हो जाएंगी।

14. खुजली

ख़ून में गंदगी हो तो खुजली होती है। इस गंदगी को बाहर निकालने के लिए मधुपर्णी के जूस में शहद मिलाकर पीना चाहिए। जिस जगह खुजली हो रही है, वहाँ गिलोय की पत्तियाँ हल्दी के साथ पीसकर लेप लगाना चाहिए।

15. कान का दर्द

कान साफ़ करने के लिए मधुपर्णी का रस कान में दो बार डालना चाहिए। दर्द हो रहा हो तो पत्तियों का रस गुनगुना करके कान में डालिए, फ़ायदा मिला जाएगा।

गुडुची का तना
Guduchi stems

16. उल्टियाँ

गिलोय के रस में मिसरी या शहद मिलाकर दिन में दो बार पीने से उल्टी की शिक़ायत नहीं होती है।

17. पीलिया

– 1 चम्मच गिलोय चूर्ण, 1/4 चम्मच कालीमिर्च, 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण और शहद मिलाकर चाटने से पीलिया ठीक हो जाता है।
– 1 चम्मच मधुपर्णी के पत्तों का रस 1 गिलास मट्ठे में मिलाकर पीने से भी जुआंडिस में राहत मिलती है।

18. बांझपन

गुरूच और अश्वगंधा को दूध में पकाकर खाने से बांझपन ख़त्म हो जाता है।

19. ट्यूबरक्लोसिस – क्षय रोग

टीबी के मरीज़ को गिलोय का रस शहद और इलायची के साथ प्रयोग करना चाहिए।

20. सौंदर्य प्रसाधन

चेहरे पर दाग़ धब्बे, पिंपल्स या झुर्रियाँ हो जाएँ तो गिलोय का लेप चेहरे पर लगाएँ। 15 मिनट बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो डालें। साथ ही साथ मधुपर्णी पानी में उबालकर पीने से रक्त शुद्ध हो जाता है, और मुहांसे नहीं निकलते हैं।
– फटी त्वचा को सही करने के लिए गिलोय का तेल दूध में मिलाकर गरम करें। ठंडा करके इसे त्वचा पर लगाएँ, इससे स्किन मुलायम और साफ़ हो जाएगी।

बरसात में होने वाली बीमारियों से बचने के लिए गुलवेल का रस रोज़ पीने से बीमारियों का ख़तरा 50% कम हो जाता है।