नेपाल में भूकम्प के भयावह परिणाम साल 2015 में देख चुके हैं। साथ ही साल 2016 में भी नेपाल और इक्वाडोर में भीषण तबाही हुई है। जब हम हिमालय क्षेत्र में भूकम्प की संभावना को देखते हैं जो नेपाल में आए भूकम्प के बाद मिले संकेतों से स्पष्ट पता चलाता है कि हिमालय रेंज की भूकम्प पट्टियाँ जो काफ़ी समय से सुसुप्तावस्था में थी अब सक्रिय हो रही हैं। जिससे भू-वैज्ञानिकों को किसी बड़े भूकम्प की आशंका हो रही है। हिमालय के गर्भ में चल रहे बदलाव के कारण 7 से 8 तीव्रता के भूकम्प का डर बन गया है।

हिमालय क्षेत्र - Himalayan range

हिमालय क्षेत्र में भूकम्प पर रिसर्च

हिमालय क्षेत्र में रिसर्च कर रहे अमेरिका, जर्मन और इटली के वैज्ञानिकों ने मध्य हिमालय क्षेत्र की पर्वतीय शृंखलाओं की ऊँचाई बढ़ने के को देखते हुए बड़े भूकम्प की आशंका जताई है। अमेरिकन वैज्ञानिक साइमन क्लैम्परर बताते हैं  कि बड़ा भूकम्प 80 से 100 साल के बाद आता है। मध्य हिमालय क्षेत्र में बड़ा भूकम्प आज 213 साल पहले आया था। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के शोध में भी भूकम्प पट्टियों के सक्रिय होने की पुष्टि हुई है। वैज्ञानिक इन भूकम्प पट्टियों की पहचान करके उन पर दृष्टि बनाए हुए हैं। किए जा रहे अध्ययन से निकलकर आ रहा है कि अगर हिमालय क्षेत्र में कोई बड़ा भूकम्प आता है तो इससे दिल्ली और पूरा एनसीआर क्षेत्र इसकी चपेट में आ जाएगा।

भूकम्प पट्टियाँ सक्रिय

भूकम्पीय पट्टियों की बढ़ती सक्रियता से हिमालय क्षेत्र में भूकम्प आ सकता है। इस क्ष्रेत्र में आ चुके भूकम्पों का अध्ययन किया जा रहा है। यूरेशियन प्लेट के नीचे धंस रही इंडियन प्लेट ख़तरे को और बढ़ा रही है। इंडक्शन से भूगर्भ में बड़ी मात्रा में ऊर्जा संचित हो रही है। यह कभी भी बाहर निकल सकती है, कहाँ से निकलेगी तय नहीं है। इससे बड़े भूकम्प की आशंका बन रही है। इंस्टीट्यूट ऑफ़ रिमोट सेंसिंग ने स्थिति का अध्य्यन और आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन से सम्बंधित प्रोग्राम शुरू कर दिए हैं।

earthquake reasons

भूकम्प का इतिहास

इतिहास को खंगाल कर देखें तो मध्य हिमालय क्षेत्र में बड़ा भूकम्प 1803 में आया था, जिसका केंद्र उत्तरकाशी के पास था। इसके इटके से दिल्ली में कुतुबमीनार का ऊपरी हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। इतना ही नहीं इस भूकम्प से मथुरा और आस पास के क्षेत्र में नुकसान हुआ था। इस भूकम्प के बाद इस क्षेत्र में कोई बड़ा भूकम्प नहीं आया है। इसी वजह से वैज्ञानिक एक और बड़े भूकम्प को लेकर आशंकित हो रहे हैं।