बच्चों के खान-पान पर ध्यान देना ज़रूरी… कई बार बच्चों को प्यार में हम कुछ भी खाने को दे देते हैं। बिना ये सोचे कि वह जो खाना चाहते हैं, वह उनके लिए कितना नुकसानदेह है। बच्चों के खान-पान में बचपन से ही ध्यान देने की ज़रूरत होती है क्योंकि कई बार जंक फ़ूड खाने की हैबिट भारी पड़ जाती हैं। इसलिए बच्चों को फ़्राइड स्नैक्स और मीठे से दूर रखने की कोशिश करनी चाहिए।

जंक फ़ूड खाने से बचना ज़रूरी

जंक फ़ूड खाने से बचें

कोल्ड ड्रिंक

लगभग सभी तरह की कोल्ड ड्रिंक बच्चों के स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं। कोल्ड ड्रिंक के रूप में जिस सोडे का बच्चे सेवन करते हैं, उससे टाइप-2 डायबिटीज होने का ख़तरा रहता है।

प्रोसेस्ड रेडमीट

प्रोसेस्ड रेड मीट भी एक तरह का जंक फ़ूड है इसे भी बचना चाहिए। क्योंकि इससे डायबिटीज होने की संभावना बढ़ जाती है। प्रोसेस्ड रेड मीट हृदय सम्बंधित बीमारियों, कोलोन कैंसर के रिस्क को भी बढ़ाता है। ऐसे आहार में वसा, नाइट्रेट काफी मात्रा में पाया जाता है।

फ्रेंच फ़्राइज़

अच्छी सेहत के लिए ऑयली खाना कम से कम लेना चाहिए। फ्रेंच फ़्राइज में न सिर्फ़ फैट पाया जाता है बल्कि इसमें कैलरीज भी बहुत ज़्यादा होती हैं। रिसर्च के मुताबिक तले हुए खाने से अन्य सब्ज़ियों में रुचि कम हो जाती है।

मीठा अनाज

मीठे अनाज में फ़ाइबर कम मात्रा में पाया जाता है और ये कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है। इसलिए मीठे अनाज से बच्चों को दूर रखें। अगर मीठे अनाज बच्चों को देना है तो बेहतर है कि जिस दाल में 10 ग्राम से कम शुगर मौजूद हो, उसे ही चुनें।

फ्रूट स्नैक्स

फलों की बात आते ही हम आँख मूँदकर उन पर भरोसा कर लेते हैं। लेकिन फलों से बना हर उत्पाद स्वास्थ्य के लिए बेहतर हो, यह ज़रूरी नहीं है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फ्रूट स्नैक्स बच्चों को नहीं देने चाहिए।

चॉकलेट

चॉकलेट तो बच्चों की सबसे पसंदीदा चीज़ों में से एक होती है लेकिन इससे दांत ख़राब होते हैं। लिहाजा इससे बच्चों को दूर ही रखना चाहिए। चॉकलेट ज्यादा खाने से शुगर लेवल बढ़ने की भी आशंका रहती है।

शहद

जब तक आपका शिशु एक साल का न हो जाए तब तक उन्हें शहद पिलाना सही नहीं है। दरअसल शहद में बीजाणु पाए जाते हैं। इससे शिशु का गला सूख सकता है, उल्टी हो सकती है, सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

चीज़

बच्चे के लिए अधिक चीज़ ख़तरनाक होती है। यह बिल्कुल जंक फ़ूड की तरह बर्ताव करती है। इससे शरीर में पौष्टिकता की कमी हो जाती है। चीज़ में कैल्शियम और प्रोटीन होता है, लेकिन 4 से 8 साल तक के बच्चों को रोज़ाना ढाई कप मिल्क प्रॉडक्ट्स की ही सलाह दी जाती है।

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