लकवा पैरालिसिस (Paralysis) को कहते हैं। शरीर के जिस भाग में लकवा मारता है, उस भाग में कुछ महसूस नहीं होता है। साथ ही शरीर का वह अंग भी काम करना बंद कर देता है। जब शरीर का कोई अंग या पूरा शरीर की मांसपेशियां काम करना बंद कर देती हैं, तो इसे पक्षाघात, फालिस या फालिज गिरना या लकवा मारना कहते हैं। शरीर के जिस भाग पर लकवा मारता है वह भाग कोई हरक़त नहीं करता है और उस अंग में कुछ महसूस नहीं होता है।

किसी भी उम्र के व्यक्ति को लकवा हो सकता है लेकिन अक्सर बड़े बुजुर्गों इस परेशानी का सामना करते हैं। पक्षाघात से उबरने में कई साल तक का समय लग जाता है। कभी कभी फालिज एक लाइलाज बीमारी बनकर रह जाती है।

लकवा के लक्षण

१. शरीर का अकड़ जाना, बॉडी का कोई हिस्सा सुन्न पड़ जाना, हाथ पैर उठाने और चलने में असमर्थ होना।
२. सिर दर्द करना, चक्कर आना या फिर बेहोशी भी हो सकती है।
३. अचानक बात करने में अटकने लगना, तुतलाना या बोलने में असमर्थ होना।
४. देखने में लाचारी, आंखों के सामने धुंधलापन या सामने की वस्तुएं दो दो दिखाई देना।

लकवा घरेलू उपचार

लकवा होने के कारण

आधा शरीर या पूरा शरीर इससे ग्रस्त हो सकता है। कोई एक अंग भी ग्रसित हो सकता है। किसी के चेहरे, मुँह, हाथ, पैर आदि भागों में अक्सर लकवा मारने की बात सामने आती है। लकवा या पैरालिसिस कई कारणों से हो सकता है।

१. रीढ़ की हड्डी में चोट

स्पाइनलकॉर्ड यानि रीढ़ की हड्डी में चोट लगने से फाजिल गिर सकती है। कमर पर चोट लगने पर पैरों में महसूस न होना, पैर न उठा पाना, चलने में असक्षम होना आदि समस्या हो सकती है। जब चोट गर्दन पर सर्वाइकल वाली जगह पर लगती है तो पैरों के साथ-साथ असर हाथों पर भी आ सकता है। स्पाइनलकॉर्ड इंजरी में कभी कभार व्यक्ति को मल मूत्र त्याग और प्रजनन न कर पाने की समस्या भी हो जाती है। रीढ़ की हड्डी यानि मेरुदंड में चोट लगने पर किसी प्रकार की समस्या के होने पर फिजियोथैरेपी का ही सहारा है। दवाएं ज़्यादा कारगर नहीं होती हैं। योग और व्यायाम करने से हालत में सुधार लाया जा सकता है। सब व्यक्ति की वर्तमान स्थिति पर निर्भर करता है।

2. मांसपेशीय दुर्विकास

इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति की नसें कमज़ोर हो जाती हैं, जिससे व्यक्ति समय के साथ चलने, फिरने और काम करने की शक्ति खोने लगता है।

३. मेरुदंड का ऑपरेशन

स्लिप डिस्क और सर्वाइकल की समस्या में तेज़ दर्द होता है। हाथ पैर बेहे सुन्न पड़ने लगते हैं। ऐसे लोग दर्द से छुटकारा पाने के लिए रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन करवाते हैं। कुछ एक मामलों में व्यक्ति को ऑपरेशन के समय या बाद में लकवा मार जाता है और वो चलने फिरने और काम करने की शक्ति खो बैठता है। अधिकांश डॉक्टर फिजियोथैरेपी को ऑपरेशन से अच्छा मानते हैं।

४. मस्तिष्क में ख़ून का थक्का

यदि किसी व्यक्ति के मस्तिष्क के किसी भाग में ख़ून न पहुंचे अथवा नस फट जाए जिससे खून का थक्का जम जाए तो इस स्थिति में भी पक्षाघात या पैरालिसिस हो जाती है।

५. पोटैशियम की कमी

मिनिरल्स शरीर के लिए बहुत ज़रूरी होते हैं। इनमें पोटैशियम भी है, जिसकी कमी से नसें कमज़ोर हो जाती हैं। जिससे व्यक्ति लकवे का शिकार हो जाता है। हालांकि सही खान पान और पोटैशियम की कमी को पूरा करके लकवा सही किया जा सकता है।

६. जीवनशैली

भोग-विलास, आलस, सिगरेट, शराब, मांसपेशियों में चोट लगने पर सही इलाज न करवाना आदि ग़लतियां बढ़ती उम्र के साथ लकवा मारने का कारण बन जाती हैं।

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पैरालिसिस अटैक होने पर तुरंत चिकित्सक के पास जाना चाहिए। जितनी जल्दी समस्या के कारण का पता चलेगा, उतनी ही जल्दी वह ठीक हो जाएगी।

सावधानी और परहेज़

नशीली वस्तुओं का सेवन न करें। भोजन में तेल, घी, मांस, मछली आदि का उपयोग न करें।

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लकवा का घरेलू इलाज

१. 250 ग्राम कड़वे तेल में 50 ग्राम काली मिर्च डालकर पकाएं। इस तेल से प्रभावित अंग पर लेप करें। इस तेल को बनाकर गुनगुना करके प्रयोग करना है। 30 दिन तक इस उपाय को करने से लकवा ठीक हो सकता है।

२. कजौंली का तेल लकवा के मरीज़ के लिए रामबाण है। इस तेल को हल्का गरम करके मालिश कीजिए। एक दिन में 3 बार एक बड़ा चम्मच तेल का सेवन कीजिए। एक महीने में आपको फ़ायदा महसूस होगा।

३. पैरालिसिस अटैक के तुरंत बाद 50 ग्राम तिल का तेल पी लें और थोड़ा कच्चा लहसुन भी चबाकर खाएं। अटैक आते ही लकवा ग्रसित भाग और सिर की सेंकाई करें। 8 दिन बाद मालिश करने से लाभ हो सकता है।

४. फालिस गिरने पर 5 कली लहसुन पीसकर शहद के साथ चाटें। 30 दिन में ही लकवा से छुटकारा मिल सकता है।

५. 5 कली लहसुन दूध में उबालकर सेवन करने से भी लाभ देखा गया है। इससे रक्त संचार ठीक हो जाएगा और प्रभावित अंग में जान आएगी।

६. देशी गाय के शुद्ध घी की दो बूँदे रोज़ नाक में डालने से पैरालिसिस में लाभ हो सकता है।

७. प्रतिदिन उरद और सौंठ को उबाल कर इसका पानी पिएं। इस उपाय से लकवा ठीक हो जाता है।

८. हर दिन 3 छुहारे दूध में भिगोकर खाने से लकवा रोगी को फ़ायदा होता है।

९. शरीर के जिस अंग पर फालिस गिरी हो उस पर खजूर के गुड़ मलने से फालिस ठीक हो सकती है।

१०. सरसों के तेल में काली उरद दाल को गरम करके उस तेल से लकवा प्रभावित अंग की मालिश करने से लाभ मिलेगा।

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११. 50 ग्राम सरसों के तेल में 5 ग्राम पिसी हुई अदरक का पेस्ट और 10 ग्राम उरद दाल को 5 मिनट तक गरम कीजिए। फिर इसमें 2 ग्राम कपूर का चूरा मिलाइए। इस तेल के गुनगुना होने पर लकवा ग्रस्त भाग की मालिश कीजिए। कुछ दिनों में फ़ायदा दिखने लगेगा।

१२. 50 ग्राम शहद 2 महीने तक खाने से लकवा ग्रस्त मरीज़ की हालत में सुधार होते देखा गया है।

१३. करेले को कच्चा और पकाकर खाने से भी पैरालिसिस ठीक हो सकता है।

१४. तांबे के बर्तन में रात का रखा पानी सुबह लकवे के मरीज को पीना चाहिए। यह भी इलाज में मदद करता है।

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