मेडिटेशन यानि ध्यान लगाना। जब किसी बात में मन न लगे और हम क्या करें ये भी समझ न आए तो परेशानी बढ़ जाती है। अगर आपको मेडिटेशन करने का सही तरीका मालूम हो जाए तो आप इन बेवजह की परेशानियों से छुटकारा पा सकते हैं। ध्यान लगाने से मन को शांति मिलती है और एकग्रता शक्ति बढ़ती है। साथ आप शारीरिक और मानसिक रूप से निरोगी रहते हैं। इस आलेख में आपको मेडिटेशन करने के सही तरीक़ों से अवगत कराया जाएगा।

मेडिटेशन का तरीका
Meditation Steps

मेडिटेशन या ध्यान लगाना क्या है?

दिल, दिमाग़ और मन को भटकने से रोकने के लिए एक वस्तु पर ध्यान एकग्र करना मेडिटेशन या ध्यान लगाना कहा जाता है।

– मेडिटेशन में आप-पास होने वाले शोर को अनसुना करके अपने मन की आवाज़ को सुना जाता है। जब हम भौतिक वस्तु और बाह्य ध्वनियों से अपना मन हटा लेते हैं तो जो शेष रह जाता है, उसे ही अंतर्मन की आवाज़ कहते हैं। अंतर्मन की आवाज़ सुनना ही ध्यान लगाना कहा जाता है।

– बाह्य वस्तुओं और ध्वनियों से सम्पर्क तोड़ने के लिए आंख और कान बंद कर लेते हैं। लेकिन हमारा मस्तिष्क हमसे कुछ कहता रहता है, जैसे – मुझे वहाँ जाना है, मुझे ये करना है, आदि। ये सब वो बातें है जो ध्यान के मार्ग में बड़ी बाधाएँ हैं। आंख और कान बंद करने आप अगर ध्यान से सुनें तो आपको दिल की धड़कन और अपनी सांसों की आवाज़ भी महसूस होगी। इन दो आवाज़ों के अतिरिक्त झींगुर द्वारा निकाली गई ध्वनि के समान तीसरी ध्वनि भी सुनाई देती है, इस पर ही ध्यान केंद्रित करना होता है।

– आरम्भ में हो सकता है कि आप इसे कम महसूस करें लेकिन अभ्यास के बाद आप इसे स्पष्ट सुन सकेंगे। जब आप इस अभ्यास में प्रवीण हो जाएंगे तब आपको बारिश, नदी की कलकल जैसी अन्य ध्वनियाँ भी सुनाई देने लगेंगी। जब आप ध्यान में सिद्धता की ओर आगे बढ़ेंगे तब आपको आत्मा की अनुभूति होने लगेगी। जिससे आपको शांति और परमानंद की अनुभूति होगी।

मेडिटेशन करना
Dhyan karna

मेडिटेशन कैसे करें?

– ध्यान लगाने के लिए एकांत और आरामदायक स्थान पर बैठें। आप पलथी मारकर बैठने से साथ-साथ किसी कुर्सी पर बैठ सकते हैं। आप चाहें तो खड़े होकर भी ध्यान लगा सकते हैं। इसमें कोई परेशानी नहीं है।

– आपको दोनों आंखें और कान बंद करने होंगे। कान बंद करने के लिए आप रुई या ईयर प्लग का प्रयोग कर सकते हैं।

– ध्यान की मुद्रा में बैठकर आप 10 बार गहरी और लम्बी सांस भरें। सांस छोड़ते समय 10 से 1 तक उल्टी गिनती करें।

– इसके बाद अंतर्मन की ध्वनि को सुनने का प्रयास करें। आस-पास की हलचल से डिस्ट्रैक्ट होने की बजाय मन को शांत करें। थोड़ी ही देर में आप अंतर्मन को सुन सकेंगे।

– भगवान श्रीकृष्ण में कहा है – विचार खुले घोड़ों की तरह इधर उधर भागते हैं। लेकिन आपको इन्हें क़ाबू करके वापस अंतर्मन की आवाज़ को सुनना है।

– आरम्भ में आपको ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होगी लेकिन धीरे धीरे अंतर्मन की ध्वनि सारा शोर और हलचल समाप्त कर देगी।

ध्यान लगाने के लिए ज़रूरी टिप्स

– ध्यान लगाना बोरियत न बने इसके लिए आप ख़ुद को उत्साहित महसूस कराएँ और आनंद की अनुभूति प्राप्त करने का प्रयास करें।

– कुछ लोग बताते हैं कि मस्तिष्क के बीचोबीच ध्यान लगाने का प्रयास करना चाहिए। लेकिन इससे मानसिक थकावट हो सकती है।

– ध्यान के लिए पूरा दिन है, आप कभी भी मेडिटेशन कर सकते हैं।

– ध्यान साधना के लिए बाह्य स्वच्छता के साथ-साथ विचार भी पवित्र होने चाहिए। इसके लिए आप अच्छी और प्रेरक पुस्तकें पढ़ सकते हैं।

मेडिटेशन करना, ध्यान लगाना
Yogasana

मेडिटेशन करने के तरीके

– मेडिटेशन कई तरह से किया जाता है। ध्यान लगाने के एक तरीका हम ऊपर बता चुके हैं। आइए कुछ दूसरे तरीकों के बारे में भी जान लेते हैं:

– म्यूज़िक सुनते हुए भी ध्यान लगाया जा सकता है। इसमें संगीत के सुरों पर एकाग्र होना पड़ता है। आज बाज़ार में मेडिटेशनल म्यूज़िक आसानी से उपलब्ध हैं।

– ध्यान लगाने के लिए आप काल्पनिक स्थान के बारे में सोचिए कि वहाँ आप क्या क्या देख व सुन सकते हैं। पेड़ों, पक्षियों, हवा की सरसराहट, नदी की कलकल, बादल और बारिश आदि कुछ भी कल्पना करें और उन चीज़ों को इस तरह महसूस करें कि आप उनके बीच हैं।

– ध्यान लगाने के लिए आप दीवार पर कोई बिंदु बनाकर या मोमबत्ती की लौ जलाकर उस पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। इसे त्राटक योग कहते हैं। इसके लिए किसी योगाचार्य की आवश्यकता हो सकती है।

मेडिटेशन के फ़ायदे

– मन को शांति मिलती है। रोज़ाना की परेशानियों से छुटकारा पाने का बेस्ट साधन है।

– गुस्सा, मानसिक तनाव और क्रोध से छुटकारा पाने के लिए ध्यान सबसे अच्छी औषधि है।

– एकग्रता आती है और सब कुछ याद रहता है।

मेडिटेशन का तरीका
Yoga Aur Sadhana

मन की एकग्रता बढ़ाने के उपाय

आज कल की लाइफ़स्टाइल में हम लोग कभी उस चीज़ से खुश नहीं रहते हैं जो हमारे पास होती है। हर पल दूसरों के पास जो है वो पाना चाहते हैं। फिर इस चक्कर में हम अपना सुख चैन खो देते हैं। जिससे हम उस वस्तु का उपभोग नहीं कर पाते हैं जो हमारे पास है। अति लालसा मन की एकग्रता की शत्रु है।

उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति छोटा मोबाइल ख़रीदता है तो उसके बाद बड़े मोबाइल को देखकर लालच करने लगता है, वह सोचता है कि इसे कैसे ख़रीदा जाए। जब वो उसे ख़रीद लेता है तो वह उससे महंगे वाले या लेटेस्ट मॉडल के बारे में सोचता है। इसका तात्पर्य है कि मनुष्य जो पा लेता है, इसे भूल जाता है। वह अगली वस्तु को देखने लगता है, जिससे उसका मन अशांत रहता है।

भौतिक सुख वास्तविक नहीं है, सच्चा सुख तो आप में ही छुपा हुआ है। उसे प्राप्त करने का प्रयास कीजिए। इसमें ध्यान योग आपकी पूरी मदद करता है, जिससे एकग्रता आती है। साथ ही आत्मा परमात्मा से जुड़ पाती है।