मुँह के कैंसर की पहली सीढ़ी म्यूकस फ़ाइब्रोसिस से हल्दी और तुलसी की पत्ती निजात दिलाने में कारगर साबित हुई है। पान मसाला, तंबाकू खाने वाले वाले लोगों का मुँह खुलना कम हो जाता है इसी स्थित को म्यूकस फ़ाइब्रोसिस कहते है। इस स्थित में मुँह के अंदर की मांसपेशियाँ कड़ी हो जाती है जिससे मुँह का खुलना बंद होता है। यही आगे चल कर मुँह के कैंसर का रूर धारण कर लेता है।

मुँह के कैंसर में हल्दी और तुलसीमुँह के कैंसर पर नया शोध

विशेषेज्ञों ने सब म्यूकस फ़ाइब्रोसिस से ग्रस्त 41 मरीज़ों पर इस नुस्खे का अजमाया देखा कि एक महीने के अंदर मुँह का खुलना काफ़ी बढ़ गया। इनका मुँह 24.4 मिमी ही खुल रहा था एक महीने तक इस नुस्खे से इलाज करने पर मुँह 27.85 मिमी तक खुलने लगा। इस नुस्खे को जर्नल ऑफ़ आयुर्वेद एँड इंटीग्रेटिव मेडिसिन ने स्वीकार करते हुए मान्यता दी है।

शोध वैज्ञानिकों ने ओरल सब म्यूकस फ़ाइब्रेसिस से ग्रस्त मरीजों को एक ग्राम पिसी हल्दी और एक ग्राम तुलसी की पत्ती (पाउडर) को इतने ग्लिसरीन में मिलाया कि गाढ़ा पेस्ट बन जाए। इस पेस्ट को चार से पाँच मुँह के अंदर गलफ़र में लगाने को कहा गया हिदायत दी गयी कि पेस्ट लगाने के 15 मिनट बात न कुछ खाएँ न पिएँ साथ ही पान मसाला, गुटखा, पान खाने की मनाही की गयी। इस नुस्खे के एक महीने इस्तेमाल के बाद ही मुँह खुलने की स्थित में सुधार दिखा।

शोध में 17 मरीज की उम्र 25 साल से कम थी जबकि 34 की उम्र 25 से अधिक थी। शोध में 34 पुरूष या सात महिलाएँ शामिल थी। शोध रिपोर्ट में बताया कि हमारे प्रदेश में पान मसाला, गुटखा का सेवन अधिक लोग करते है जिसके कारण 0.2 से 0.5 फ़ीसदी लोग म्यूकस फ़ाइब्रोसिस से ग्रस्त होते है इसका सही समय पर सही इलाज न होने पर इनमें से दो से 10 फ़ीसद में और मुँह का कैसर होता है।

शोध रिपोर्ट में कहा गया है यंग पापुलेशन सबसे अधिक इस परेशानी का शिकार हो रही है। इस नुस्खे का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं जबकि दूसरी विधा में साइड इफ़ेक्ट की आशंका रहती है। शोध में बीएचयू के डॉ० अदिति श्रीवास्तव, डॉ० राहुल अग्रवाल, डॉ० टीपी चतुर्वेदी, डॉ० अखिलेश और डॉ० ओपी सिंह शामिल थे।

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