क्या आप बिग बैंग थ्योरी (Big bang theory) को मानते हैं? अगर आपको इस सिद्धांत पर कोई शक है तो आपके सामने एक नया मत प्रस्तुत है जिसके अनुसार हमारा ब्रह्माण्ड किसी धमाके के साथ नहीं हुआ था।

नया सिद्धांत कहता है कि ब्रह्मांड कभी भी सिंगुलैरिटी नहीं था, न ही अनंत रूप से छोटा था और न ही अनंत रूप से घना था। वास्तव में ये भी हो सकता है कि ब्रह्मांड की कभी शुरुआत ही नहीं हो।

यूनीवर्सिटी ऑफ़ लेथब्रिज, कनाडा के सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी सौर्य दास (Saurya Das) कहते हैं कि “नये मत के अनुसार ब्रह्मांड की उम्र अनंत हो सकती है।”

यह नया सिद्धांत डार्क मैटर (Dark Matter) को भी समझा सकता है। डार्क मैटर वही रहस्यमय अदृश्य पदार्थ है जिससे ब्रह्मांड के अधिकांश पदार्थों की उत्पत्ति हुई है।

बिग बैंग थ्योरी का रहस्यबिग बैंग का अस्तित्व | No Big Bang

बिग बैंग थ्योरी के हिसाब से हमारे ब्रह्मांड की उत्पत्ति लगभग 13.8 बिलियन वर्ष पहले हुई थी। आज उपस्थित हर पदार्थ कभी अनंत रूप से घना था, अनंत रूप से छोटा था, अत्यंत गर्म बिंदु था, जिसे सिंगुलैरिटी (Singularity) कहा जाता है। यही आग का गोला फटा और उसने प्रारम्भिक ब्रह्मांड को उत्पन्न किया।

सिंगुलैरिटी की उत्पत्ति को अल्बर्ट आइंस्टाइन के सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत (Albert Einstein’s theory of general relativity) से साबित किया जा सकता है। यह सिद्धांत स्पष्ट करता है कि वस्तु कैसे अंतरिक्ष-समय को ढकती है। एक अन्य समीकरण जिसे रायचौधरी समीकरण (Raychaudhuri’s equation) कहा जाता है, यह अनुमान लगाता है कि किसी वस्तु का प्रक्षेप पथ (Trajectory) समय की ओर झुकेगी अथवा उससे दूर हटेगी। इन दोनों समीकरणों को यदि भूतकाल में जाते हुए गणना करें तो यह पता चलता है कि ब्रह्मांड का सारा पदार्थ कभी एक बिंदु पर ही था – यही बिग बैंग सिंगुलैरिटी है।

लेकिन यह पूरा सच नहीं है। आइंस्टाइन के समीकरण में भौतिकी के नियम सिंगुलैरिटी पर पहुँचने से पहले ही टूट जाते हैं लेकिन भौतिक विज्ञानी इनके अनुसार अनुमानित गणना करते हैं। इस प्रकार से यदि हम कहें कि बिग बैंग एक सच है तो ऐसा कहना ग़लत भी हो सकता है।

एक अन्य समस्या है कि भौतिकी के दो महत्वपूर्ण सिद्धांत क्वांटम मिकैनिक्स और जनरल रिलेटिविटी को आज तक एक दूसरे से साथ जोड़कर नहीं देखा जा सका है।

क्वांटम मिकैनिक्स (Quantum Mechanics) कहती है छोटे-छोटे परमाणुओं के कणों का बर्ताव मौलिक रूप से अनिश्चित है। अल्बर्ट आइंस्टाइन के सामान्य सापेक्षता का सिद्धांत इससे मेल नहीं खाता है, यह कहता है कि भविष्य को भूत की सहायता से पहले ही जाना जा सकता है।

इनमें से कोई भी सिद्धांत डार्क मैटर को स्पष्ट नहीं करता है। अदृश्य डार्क मैटर सभी वस्तुओं पर गुरुत्वीय खिंचाव डालता है किन्तु इसे किसी भी टेलीस्कोप से नहीं देखा जा सकता है।

क्वांटम सुधार पद । Quantum Correction Term

दास और उनके साथी इनमें कुछ समस्याओं का सुलझाने का एक रास्ता निकलना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने क्वांटम मिकैनिक्स के एक पुराने सिद्धांत – बोह्मियन मिकैनिक्स (Bohmian Mechanics) पर विचार किया है। जिसमें एक छिपा हुआ चर (वैरीएबल) परमाणु के कणों के विचित्र व्यवहार को नियंत्रित करता है। क्वांटम मिकैनिक्स के अन्य समीकरणों से अलग यह किसी कण के प्रक्षेप पथ की गणना करने का रास्ता बताता है।

क्वांटम सिद्धांत के पुराने रूप का प्रयोग करके शोधकर्ताओं ने एक छोटा सुधार पद खोजा है जिसे आइंस्टाइन के सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत में जोड़ा जा सकता है। इसके बाद उन्होंने गहरे समय में क्या घटता है, इसकी गणना की। परिणाम स्वरूप नये समीकरण ने बताया कि सिंगुलैरिटी जैसी कोई चीज़ नहीं है और यह ब्रह्मांड अनंत रूप से पुराना है अर्थात्‌ यह सदा-सदा से है।

सिद्धांत की जाँच । Close Review

दास कहते हैं कि इस बदले हुए समीकरण में “क्वांटम सुधार पद” की व्याख्या डार्क मैटर के घनत्व के रूप में की जा सकती है। अगर ऐसा मान रहे हैं तो ब्रह्मांड काल्पनिक कणों से बने एक सुपरफ्लूइड (Superfluid) से भरा हुआ है। ऐसे में गुरुत्व रखने वाले कण “ग्रैविटॉन” (Graviton) कहे जाते हैं, या अत्यंत ठंडे गोस्ट्लाइक कण “एक्सीऑन” (Axion) कहे जाते हैं।

इस नयी थ्योरी को जाँचने के लिए यह देखना होगा कि ब्रह्मांड का डार्क मैटर किस प्रकार बिखरा है और पता कीजिए कि क्या इसके गुण प्रस्तावित सुपरप्लूइड के गुण से मिलते हैं। यदि ये आपस में लगभग भी मिलते हों तो यह एक अच्छी ख़बर है।

हालाँकि नया समीकरण क्वांटम मिकैनिक्स और सामान्य सापेक्षता को एकजुट करने का एक रास्ता है। उदाहरण के लिए, स्ट्रिंग थ्योरी के एक भाग जिसे स्ट्रिंग गैस कॉज़्मोलॉजी (String Gas Cosmology) के रूप में जाना जाता है, यह अनुमान लगाता है कि ब्रह्मांड का बहुत लम्बा स्थिर काल था। जबकि अन्य थ्योरीज़ अनुमान लगाती हैं कि कॉज़्मिक बाउंस (Cosmic Bounce) हुआ था, जिसमें ब्रह्मांड पहले एक बहुत छोटे बिंदु के रूप में सिकुड़ा और फिर फैलना शुरु हुआ।

दोनों थ्योरी में एक बात समान है कि ब्रह्मांड कभी न कभी बहुत ही छोटा और अत्यंत गर्म था।

अत: यह पक्का है कि शुरुआती समय में एक अत्यंत गर्म आग का गोला उपस्थित था। लेकिन आप जब भी सिंगुलैरिटी की खोज करेंगे समस्या ही खड़ी होगी।

नयी थ्योरी एक रिसर्च जनरल में पब्लिश हुई है, जिसे आप यहाँ देख सकते हैं। एक अन्य सम्बंधित रिसर्च पेपर प्री-प्रिंट जनरल “arXiv” में भी छप चुका है, जिसे आप यहाँ देख सकते हैं