पीरियड्स को मासिक धर्म, माहवारी और पीरियड साइकल भी कहते हैं। बहुत सी गर्ल्स ये सोचती हैं कि पीरियड्स क्यों होते हैं। यह एक ऐसी प्रक्रिया होती है, जिसमें गर्भ बनने वाले अंडे निषेचन न होने कारण योनि मार्ग से बाहर आते हैं। इस समय शरीर में कमज़ोरी और माहवारी का दर्द होता है। ये प्रक्रिया औसतन हर महीने होती है, कुछ महिलाओं के लिए यह समय मुश्किल भरा होता है। कुछ लड़कियों के पीरियड्स समय से आते हैं, तो कुछ भी अनियमित हो जाते हैं।

अगर मासिक धर्म अपने निश्चित समय से होता है, तो महिला का प्रजनन तंत्र ठीक प्रकार से काम कर रहा है। इस समय ब्लीडिंग होने के कारण दर्द भी होता है। ऐसे उपाय होते हैं, जिनसे माहवारी के दर्द से राहत मिल सकती है। इस आलेख में हम पीरियड्स का दर्द कम करने के लिए घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय जानेंगे।

पीरियड्स की समस्याएँ

– सिर दर्द की शिक़ायत
– कमर दर्द की शिक़ायत
– पेट के निचले भाग में दर्द उठना
– शरीर में किसी जगह सूजन आना
– अधिक नींद आना

वैसे तो पीरियड्स ख़त्म होने पर उपरोक्त परेशानियाँ ख़त्म हो जाती हैं, पर अगर महिलाएँ हेल्दी खाना खाएँ और व्यायाम करें तो माहवारी का दर्द कम होता है। माहवारी के समय हैवी एक्सरसाइज़ नहीं करनी चाहिए, साथ ही भारी वस्तुएँ उठाने से बचना चाहिए।

माहवारी का दर्द
Periods pain

माहवारी के दर्द का कारण

शारीरिक और मानसिक बदलाव के कारण पेट के निचले भाग में दर्द होना आम बात है। डॉक्टर्स कहते हैं कि इस दर्द का प्रमुख कारण प्रॉस्टाग्लैंडिन नामक रसायन है, जो गर्भाशय के समीप निकलता है। शारीरिक क्षमता और बनावट पर दर्द की जगह निर्भर करती है। उम्र के साथ साथ इस दर्द में कमी होती जाती है।

माहवारी का दर्द और घरेलू उपाय

1. सिंकाई करें

माहवारी का दर्द कम करने के लिए गर्म तौलिए या हीट पैक से 5 से 10 मिनट तक पेट के निचले भाग की सिंकाई करनी चाहिए। इससे शरीर से निकलने वाली गंदगी आसानी से बाहर निकल जाती है, जिससे दर्द दूर हो जाता है। पेन किलर दवाओं के प्रयोग से बचना चाहिए।

2. खाने पीने पर ध्यान दें

मासिक धर्म के समय शरीर में आयरन और वाइटमिंस की खपत बढ़ जाती है। अगर समय पर इन तत्वों की पूर्ति नहीं की जाए तो अगली बार माहवारी होने पर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए बॉडी में न्यूट्रिशन की कमी को पूरा करने के लिए हरी सब्ज़ियाँ, दूध, दही और फलाहार करना चाहिए। मासिक चक्र नियमित करने वाली खाने की 8 चीज़ें के बारे में जानिए।

3. गरम पानी से नहाएँ

गर्म पानी से स्नान करने से शरीर का तापमान बढ़ता है, जिससे गर्भाशय ग्रीव से रक्त आसानी से निकल जाता है। पीरियड्स में होने वाली समस्याओं से बचने के लिए दिन में 2-3 से बार गर्म पानी से नहाना चाहिए।

4. मालिश करें

पेट पर 5-10 मिनट तक हल्के हाथों से मालिश करें। इससे सूजन कम होने लगती है। आप लेटकर, बैठकर या फिर खड़े होकर भी मालिश कर सकते हैं। मसाज करने से पहले तेल को हल्का गरम कर लेना चाहिए। मालिश के लिए नारियल तेल या ऑलिव आयल प्रयोग करना चाहिए।

5. पानी अधिक पिएँ

माहवारी में पानी अधिक पीना चाहिए। अच्छे परिणाम के लिए गुनगुना पानी पीना चाहिए। इसके अलावा ग्रीन टी का सेवन भी लाभदायक होता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को लाभ पहुंचाते हैं।

मासिक धर्म का दर्द और आयुर्वेदिक उपाय

– 1 गिलास गुनगुने दूध में 1 चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पिएँ। हल्दी शरीर में गर्मी लाती है, जिससे माहवारी में परेशानी और दर्द कम हो जाता है। जो महिलाएँ पीरियड्स के दिनों में आम दिनों की तरह रहना चाहती है, उनको हल्दी वाला दूध ज़रूर पीना चाहिए।

– माहवारी का दर्द कम करने के लिए आप घर पर आयुर्वेदिक दवा बना सकती हैं। एक बर्तन में 1 गिलास पानी उबालकर उसमें 2 चम्मच जीरा, 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच हल्दी मिलाएँ और गाढ़ा होने तक उबालें। इस काढ़े को बिना छाने 1 कप पीजिए। इसे दिन को दो बार पीने से दर्द कम हो जाता है।

Kotex sanitary napkin
Kotex sanitary napkin

पीरियड्स का दर्द कम करने के व्यायाम

– अधिक वज़न वाली लड़कियों को माहवारी के समय ज़्यादा परेशानी होती है। इसलिए योग और व्यायाम को लाइफ़स्टाइल का हिस्सा बना लीजिए। जो महिलाएँ अपनी फ़िटनेस का ध्यान रखती हैं, उनको पीरियड्स में कम परेशानी होती है।
– पीरियड्स में व्यायाम करना सुरक्षित है। इससे बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन अच्छा रहता है, जिससे दर्द कम होता है।
– ज़्यादा तक़लीफ़ हो तो व्यायाम करने की जगह आराम करना अधिक फ़ायदेमंद होता है।
– माहवारी के समय हल्का फुल्का एक्सरसाइज़ करना चाहिए। हैवी वेट और एक्सरसाइज़ से बचना चाहिए।

पीरियड्स में इंफ़ेक्शन से बचाव

मासिक धर्म के समय किसी की प्रकार के इंफ़ेक्शन से बचने के लिए साफ़-सफ़ाई का ख़ास ख़याल रखना चाहिए। क्योंकि पीरियड्स के समय इंफ़ेक्शन होने का ख़तरा बढ़ जाता है। इसलिए डॉक्टर्स सलाह देते हैं, हर 6 घंटे पर पैड (नैपकिन) बदल देना चाहिए।

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