मेरी बुआ की छोटी बेटी को एक दिन बहुत बुख़ार था। उसके हाथ पैरों में भी दर्द हो रहा था। लेकिन बुआ ने इसे साधारण बुखार समझकर बेटी को काढ़ा पिला दिया जिससे उसका बुखार ठीक हो जाए। बुख़ार तो कम नहीं हुआ लेकिन चौथे दिन उसके पैरों में कुछ कमज़ोरी लगी जिस कारण से उसका पैर काम नहीं कर रहा था। शायद ये लकवा के लक्षण थे। जब उसके पैर ने काम करना बन्द कर दिया तभी बुआ उसे डॉक्टर के पास ले गई। डॉक्टर ने उसका निरीक्षण किया और कहा इसकी ये हालत पोलियो के कारण है, लेकिन बुआ की जानकारी के अभाव और लापरवाही के कारण आज उनकी बेटी पोलियो का शिकार हो गई और उसका एक पांव बेकार हो गया तो आगे कोई और बच्चा ऐसे रोग के शिकार न हो इसके लिए सभी माता पिता का जागरूक होना बहुत ज़रूरी है। तो आइए पोलियो रोग के विषय में जानें…

Polio drop, पोलियो के कारण

पोलियो रोग का कारण

पोलियोमायलाइटिस रोग _ Poliomyelitis पोलियो विषाणु के संक्रमण के कारण होता है। यह वायरस व्यक्ति के संपर्क से, नाक या मुँह और संक्रमित बच्चे का आम तौर पर दूषित पानी के माध्यम से, संक्रमित मल के साथ संपर्क से, संक्रमित बलगम के साथ संपर्क के माध्यम से फैलता है।

पोलियो के लक्षण

बुख़ार, सिरदर्द, जीमिचलाना, गले में ख़राश, उल्टी, थकान, गर्दन, पीठ, हाथ या पैर में दर्द या जकड़न, मांसपेशियों में कमज़ोरी का महसूस होना यह सारे पोलियो के लक्षण है। इसके गंभीर लक्षणों में दिमागी बुख़ार (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के संक्रमण) और पैर या हाथ का अपरिवर्तनीय परिवर्तन शामिल हैं।

ये अधिकांश लक्षण वायरल फ़्लू के भी हो सकते हैं, इसलिए अगर आपके शिशु को ऐसे लक्षण हों, तो डॉक्टर से ज़रूर सम्पर्क करें।

पोलियो से प्रभावित अंग

पोलियोमायलाइटिस को पोलियो _ Polio या शिशु लकवा कहा जाता है। पोलियो एक गंभीर वायरल संक्रमण और विषाणुजन्य रोग है जो सबसे ज़्यादा बच्चों में पाया जाता है। यह वैसे तो पूरे शरीर को प्रभावित करता है। लेकिन यह सबसे ज़्यादा नसों, मांस पेशियों और रीढ़ की हड्डी को संक्रमित करता है।

पोलियो का प्रभाव

पोलियो रोग मुख्यत: एक से पाँच वर्ष तक के सभी उम्र के बच्चों को अपना शिकार बनाता है। यह नवजात शिशु या पाँच वर्ष तक के बच्चों के शरीर में प्रवेश कर उनके हाथ या पांवों में विकलांगता पैदा कर देता है। इस रोग से ग्रसित बच्चे खड़े होकर चल भी नहीं सकते और वे अपने हाथ से कार्य करने में भी असमर्थ हो जाते हैं।

Polio vaccination, पोलियो टीका

पोलियो का टीका

पोलियो का कोई इलाज नहीं है, लेकिन पोलियो वैक्‍सीन कई बार दिए जाने पर यह सदैव बच्‍चे को जीवन भर के लिए सुरक्षा प्रदान करता है। पोलियो रोग में 5 वर्ष से कम उम्र के सभी बच्चों को मुंह के द्वारा पोलियो वैक्सीन यानी ओपीवी _ ओरल पोलियो वैक्सीन _ Oral Polio Vaccine दिया जाता है। ओपीवी वैक्सीन का विकास 1961 में डॉ अल्बर्ट सैबिन _ Albert Sabin ने किया था। आईपीवी वैक्सीन का विकास जोनास सॉक _ Jonas Salk ने किया था

पोलियो के टीके के प्रकार

मौखिक पोलियो टीका / ओ. पी. वी. तथा निष्क्रिय पोलियो टीका / आई. पी. वी.।

पोलियो के टीके दो तरह के हैं:

1. मौखिक पोलियो टीका (ओ पी वी )

यह रोग को विकसित किए बिना ही शरीर को इसके विरुद्ध एंटीबॉडीज़ के उत्पादन के लिए प्रेरित करता है। मुंह में बूंदों (ड्रॉप्स) के ज़रिये दी जाने वाली यह खुराक न केवल दवा लेने वाले की सुरक्षा करता, बल्कि उसके आसपास रहने वाले लोगों को भी सुरक्षा प्रदान करता है।

2. निष्क्रिय पोलियो टीका (आई पी वी )

आई पी वी अत्याधिक प्रभावी होने के बावजूद केवल टीका लगाए गए व्यक्ति को ही सुरक्षा प्रदान करता है, यह दूसरों को सुरक्षा नहीं प्रदान करता है। यह इंजेक्शन के ज़रिये दिया जाता है।

पोलियो वैक्सीन की ख़ुराक

ओपीवी (मौखिक पोलियो वैक्सीन) की पांच खुराक होती है। पोलियो की पहली ख़ुराक जन्म के समय, तीसरी प्राथमिक ख़ुराक छह, दस और चौदह सप्ताह तथा सौलह से चौबीस माह की अवस्था में बूस्टर ख़ुराक दी जाती है।

पल्स पोलियो अभियान

देश में 1985 में पोलियो के शिकार हुए लोगों की संख्या 1,50,000 के क़रीब थी। भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के 192 सदस्य देशों के साथ 1988 में वैश्विक पोलियो उन्मूलन लक्ष्य का संकल्प लिया था।

भारत को पोलियो मुक्त करने के लिए पल्स पोलियो अभियान व दो बूंद ज़िंदगी के ये नारा भी चलाया गया।इस अभियान के तहत आज हमारा भारत पोलियो रोग से मुक्त हो पाया। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 24 अक्तूबर, 2012 को भारत का नाम पोलियो प्रभावित देशों की सूची से हटा दिया। जिस कारण से आज हम पोलियो मुक्त देश के नागरिक हो पाए हैं।

पोलियो दिवस

24 अक्टूबर को विश्व पोलियो दिवस सारे विश्व में मनाया जाता है। जोनास सॉक ने पोलियो के खिलाफ़ आईपीवी वैक्सीन का विकास किया था। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। पोलियो टीकाकरण की शुरुआत दुनिया भर में पोलियो को समाप्त करने के लिए किया गया।

इस जानकारी का उद्देश्य बस इतना है कि आप जागरूक बनें ताकि इन लक्षणों के नज़र आते ही आप डॉक्टर से सम्पर्क कर एक नन्हींं सी जान की सुरक्षा कर सकें। सभी लोगों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें और राष्ट्र के विकास में अपना पूर्ण योगदान दें।