प्रेग्नेंसी में डाइट अच्छी हो तो बच्चा स्वस्थ पैदा होता है। इसलिए प्रेग्नेंट महिला को संतुलित आहार लेना चाहिए, जो कि न्यूट्रिशन से भरपूर होता है। गर्भधारण के बाद किसी महिला को पहले से अधिक कैलोरी की ज़रूरत होती है। हर महिला एक स्वस्थ और सेहतमंद बच्चे को जन्म देने की चाह रखती है। इसके लिए बहुत सी बातों का ध्यान रखना पड़ता है, जिनमें पौष्टिक आहार भी शामिल है। बच्चे की ग्रोथ उसके माँ की खुराक पर निर्भर करती है। इसलिए माँ बनने वाली महिला को पोषक तत्वों वाला संतुलित आहार खाना चाहिए। इस आलेख में हम हेल्दी डिलिवरी के लिए प्रेग्नेंसी का डाइट चार्ट जानेंगे।

प्रेग्नेंसी के तीसरे महीने में स्त्री के शरीर में बहुत अधिक हलचल होती है। इस समय बच्चे की किडनी, दिल, आंखें, गुप्तांग बनने लगते हैं। गर्भावस्था के समय महिलाओं को जंक फ़ूड और डिब्बा बंद आहार का सेवन नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंट महिला की डाइट
Pregnant diet

हेल्दी प्रेग्नेंसी के लिए क्या खाएँ

प्रेग्नेंट महिला जो खाती है, वह ख़ून से उसके बच्चे तक पहुंचता है। इसलिए अपनी डाइट में कोई वस्तु शामिल करने से पहले डॉक्टर से पूछ लेना चाहिए। हम आपको आज यही बताने वाले हैं कि क्या खाने से बच्चे का पूरा और सही विकास होता है।

1. समुद्री भोजन

सी फ़ूड में ओमेगा-3 फ़ैटी एसिड होता है, जो बच्चे की सेहत की लिए अच्छा होता है। लेकिन कुछ समुद्री जीवों में पारा भी होता है, जो बच्चे के दिमागी विकास को बाधित कर सकता है। इसलिए सलमोन मछली, केकड़ा और शर्क के मांस से परहेज़ रखना चाहिए।

2. कच्चा खाना

कच्चे खाने में बैक्टीरिया और वायरस हो सकते हैं जो प्रेग्नेंट महिला और उसके शिशु दोनों के लिए हानिकारक होते हैं। हमेशा अच्छी तरह से पकाया हुआ भोजन खाना चाहिए। फलों में कच्चा पपीता खाने से बचना चाहिए। इससे गर्भपात की संभावना बन सकती है।

3. बिना धुली हुई सब्ज़ियाँ और फल

फलों व सब्ज़ियों को खाने से पहले अच्छे से साफ़ में धो लेना चाहिए। ताकि उस पर जमी गंदगी आपको बीमार न कर दे।

4. शराब और स्मोकिंग

प्रेग्नेंट महिला को प्रेग्नेंसी के समय स्मोकिंग और शराब का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए, इससे बच्चे की सेहत पर उल्टा असर पड़ता है। तासीर गर्म होने के कारण गर्भपात का ख़तरा भी हो सकत है। चाय कॉफ़ी का सेवन निश्चित मात्रा में करना चाहिए।

5. दवाइयों का प्रयोग

अगर आप किसी बीमारी का इलाज कराना चाहती हैं, तो अपने डॉक्टर को अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में ज़रूरत बताइए। कई महिलाएँ ज़रा सा दर्द होने पर पेन किलर की आदी हो जाती है। अपनी इस आदत को प्रेग्नेंसी के समय छोड़ दें। क्योंकि ऐसी मेडिसिन बच्चे के विकास को बिगाड़ सकती हैं।

प्रेगनेंट महिला की डाइट
Pregnant eating

प्रेग्नेंट महिला के लिए डाइट चार्ट

1. आयरन

शरीर में ख़ून की कमी न हो इसलिए प्रेग्नेंट महिला को शुरुआती दिनों में आयरन की गोलियाँ खानी चाहिए। साथ ही अपने खाने में मछली, अंडे की ज़र्दी, ब्रोकली, मसूर, जामुन, सोयाबीन, पालक आदि शामिल करें।

2. पानी की मात्रा

शरीर में पोषक तत्वों और ज़रूरी मिनिरल्स की कमी न हो, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। रोज़ाना 3-4 लीटर पानी कम से कम पीना चाहिए। गर्मी के दिनों में पानी की मात्रा इससे अधिक भी की जा सकती है। इसके अलावा नारियल पानी और ताज़े फलों का जूस भी ले सकते हैं। हमेशा उबला हुआ पानी पीना चाहिए।

3. फ़ाइबर युक्त आहार

कब्ज़ जैसे बीमारियों से बचने के लिए फ़ाइबर वाली वस्तुएँ अपनी डाइट चार्ट में जोड़िए। हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, फल, ब्राउन ब्रेड, खजूर, लाल चावल, अजवाइन आदि।

बच्चे के शारीरिक विकास के लिए विटामिन बी, विटामिन सी, आयरन और मैगनीशियम जैसी न्यूट्रिशन की ज़रूरत पड़ती है। इसके लिए गेहूँ की रोटी, मक्का और चावल को डाइट में रखें। विटामिन सी से भरपूर खट्टी चीज़ों का उचित मात्रा में सेवन करना चाहिए। जैसे मौसमी, संतरा और आंवला आदि।

4. कार्बोहाइड्रेट

रोटी, आलू और चावल में पाए जाने वाले कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा देते हैं, और इस ऊर्जा की आवश्यकता महिला को गर्भावस्था में और भी पड़ती है। ध्यान रहे – ये सब खाने से मोटापा बढ़ता है।

5. फ़ोलिक एसिड

फ़ोलिक एसिड से बच्चे की खाने की नली को स्वस्थ रखता है। स्ट्राबरी, फल, हरी सब्ज़ियों और संतरे में फ़ोलिक एसिड ज़्यादा होता है।

6. कैल्शियम

प्रेग्नेंट वूमन को कैल्शियम की सही मात्रा लेना बहुत ज़रूरी है, इससे बच्चे की हड्डियों के विकास में मदद मिलती है। साथ ही नार्मल डिलिवरी में भी ज़्यादा परेशानी नहीं आती है। रोज़ाना दो गिलास दूध पीना चाहिए और ऐसी चीज़ें खानी चाहिए जिससे शरीर में कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा मिल सके। जैसे दही, ओट्स, साग और बादाम आदि।

7. आयोडीन नमक

बच्चे के मानसिक विकास के लिए आयोडीन की ज़रूरत होती है। आयोडीन की कमी से गर्भपात का ख़तरा और बच्चे को मानसिक रोग हो सकता है। इसलिए प्रेग्नेंट महिला को आयोडीन नमक का सेवन करना चाहिए।

8. प्रोटीन

प्रोटीन हमारे शरीर में मांसपेशियों के विकास और मज़बूती के लिए आवश्यक होता है। प्रोटीन के कारण ही गर्भवती के गर्भाशय और स्तनों का विकास होता है। इसलिए अपनी डाइट में मेवे, दालें और अंडे शामिल करने चाहिए। अगर आप शाकाहारी हैं तो आपको सोयाबीन, पनीर और उबले हुए चने खाने चाहिए। इन सबमें प्रोटीन अधिक मात्रा में होता है।

काम की बातें –

– गर्भवती को हर 4 घंटे में कुछ न कुछ अवश्य खाना चाहिए, भले ही भूख कम लगी हो।
– गर्भधारण में बाद उपवास नहीं करना चाहिए
– तीखा और मसालेदार भोजन नहीं खाना चाहिए
– मादक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए
– डॉक्टर के पास नियमित रूप से जाकर जांच कराते रहनी चाहिए।
– आयरन और विटामिन की गोलियों का सेवन डॉक्टरी सलाह से करना चाहिए।