जब बच्चे छोटे होते हैं तो उनमें चिड़चिड़ापन स्वाभाविक है। लेकिन यदि वह अधिक चिड़ाचिड़ाने लगे तो उसे आपको इस बात को गौर करना चाहिए। अगर आप इसे नज़रअंदाज़ करने की ग़लती करेंगे तो यह एक प्रॉब्लम का रूप भी ले सकती है। शिशुओं का थोड़ी-थोड़ी देर पर रोना और चिड़चि‌ड़ाना कई परिस्थितियों में स्वाभाविक होता है। ज़्यादातर शिशु प्रतिदिन एक से तीन घंटे तक ऐसा बर्ताव कर सकते हैं। लेकिन अगर चिड़चिड़ापन उसकी आदत में शुमार होने लगे तो यह कई संकेत देता है। जिन्हें समय पर जानना और शिशु का चिड़चिड़ापन दूर करना ज़रूरी है। आइए जानते हैं कि शिशु में चिड़चिड़ापन कब सामान्य और कब किसी समस्या की ओर संकेत करता है।

शिशु में चिड़चिड़ापन

शिशु में चिड़चिड़ापन स्वाभाविक है

आमतौर पर हर शिशु थोड़ी-थोड़ी देर पर रोता और चिड़चिड़ा बर्ताव करता है, लेकिन अधिकांशत: यह गम्भीर समस्या को इंगित नहीं करता है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि शिशु अपनी हर ज़रूरत के लिए अपने आस-पास के लोगों पर पूर्णतया आश्रित होता है और अपनी बात को बोलकर नहीं बता सकता है। इसलिए वह रोकर या चिड़चिड़ाकर अपनी बात कहने की कोशिश करता है। ये सामने वाले की समझदारी पर है कि वह उसकी ज़रूरत को कितनी जल्दी समझ जाता है। शिशु भूखा हो, आराम करना चाहता हो या खेलना चाहता हो, वह हर बात को रोकर और चिड़चिड़ाकर व्यक्त करता है।

लेकिन कई बार शिशु में चिड़चिड़ापन आवश्यकता से अधिक होता है और शिशु क्या चाहता है, इसे समझना मुश्किल हो जाता है। शिशु रोता ही रहता है और आप उसे पुचकारते ही रह जाते हैं। ऐसी स्थिति में आवश्यक हो जाता है कि आप उसके हाव-भाव को समझने का प्रयास करें। जैसे जैसे आप उसकी बॉडी लैंग्विज समझने लगते हैं तो फिर यह कोई समस्या नहीं रह जाती है।

मानसिक बीमारी को ओर संकेत

वैज्ञानिकों के एक शोध में इस बात पर अपनी सहमति दर्ज की है कि जब शिशु स्वाभाविक रूप से अधिक रोये और चिड़ाचिड़ाए तो यह मानसिक समस्या का संकेत भी हो सकता है। शोध के दौरान बनाई गई एक प्रश्नावली शिशु के दुर्व्यवहार और गम्भीर दुर्व्यवहार में बीच अंतर करने में प्रयोग की जाती है। चाइल्ड साइकोलॉजी एंड साइकेट्री पत्रिका के अनुसार यह प्रश्नावली शिशुओं के मानसिक समस्या को प्रारम्भिक अवस्था में पहचानने और उसके इलाज में सहायक है।

प्रो० वाक्सश्लाग बताते हैं कि अधिक शिशु में चिड़चिड़ापन इस बात का संकेत है कि वह मानसिक रूप से संघर्ष कर रहा है। शिशु लड़का हो या फिर लड़की दोनों में चिड़ाचिड़ापन एक सा ही होता है। अगर इनके स्वाभाव में अधिक चिड़चिड़ापन आने लगे तो तुरंत की अच्छे चिकित्सक से परामर्श लें।

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