साँप का विष मनुष्य के शरीर पर कई तरह से असर करता है। साँप की प्रजाति पर निर्भर करता है कि उसका ज़हर कैसा है और वह किस तरह से अपने ज़हर का प्रयोग करता है। विभिन्न प्रजाति के साँपों का ज़हर अलग अलग प्रकार का होता है। लेकिन भौगोलिक स्थिति के अनुसार एक ही प्रजाति के साँपों का ज़हर भी अलग अलग प्रकार का हो सकता है, क्योंकि उनके ज़हर में अलग अलग तत्व पाए जाते हैं। इसलिए साँप के काटने पर उसकी प्रजाति को सही सही जानना आवश्यक होता है। ताकि सही समय पर एंटी-वेनम दिया जा सके।

साँप का विष

साँप के विष के प्रकार

सामान्य रूप से साँप का विष तीन प्रकार का होता है-

1. हेमोटॉक्सिक विष (Hemotoxic Venom)
2. सायटोटॉक्सिक विष (Cytotoxic Venom)
3. न्यूरोटॉक्सिक विष (Neurotoxic Venom)

साँप का विष और उसका असर

हेमोटॉक्सिक ज़हर कार्डियोवस्कुलर प्रणाली पर आघात करता है, साइटटोटॉक्सिक ज़हर किसी विशेष अंग या माँसपेशियों के समूह पर जबकि न्यूरोटॉक्सिक ज़हर दिमाग़ और तांत्रिका तंत्र पर असर करता है। कुछ साँपों में दो या तीनों प्रकार का ज़हर होता है ताकि वो शिकार को चित कर सकें। सभी तरह के ज़हर एंजाइम्स और प्रोटीनों के जटिल मिश्रण होते हैं।

जब एक हेमोटोक्सिन ज़हर वाला साँप काटता है तो शरीर का रक्त चाप कम हो जाता है और रक्त में थक्के जम जाते हैं। ये ज़हर दिल की माँसपेशियों पर भी असर करता है, जिसके कारण मौत हो जाती है। साइटोटॉक्सिन ज़हर से ऊतक निष्क्रिय हो जाते हैं। जिससे शरीर के जोड़ (घुटने, कोहनी, पंख आदि) काम करना बंद कर देते हैं। बहुत से साइटोटॉक्सिक ज़हर शरीर की माँसपेशियों को भेद्य (Permeable) बनाकर शरीर पर जल्दी असर करते हैं।

एक न्यूरोटॉक्सिक ज़हर तंत्रिका तंत्र को निष्क्रिय कर देता है। जिससे पैरालिसिस या लक़वा मार जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि तंत्रिकाएँ माँसपेशियों तक सही सिग्नल नहीं पहुँचा पाती हैं। ये ज़हर शरीर में एटीपी की आपूर्ति पर हमला करता है; एटीपी एक न्यूक्लिओटाइड होता है जो कोशिकाओं के बीच ऊर्जा स्थांतरण करता है।

पहले शोधकर्ता विश्वास करते थे कि कई साँपों के ज़हर में पाचक एंज़ाइम होते हैं जो शिकार को पचाने में सहायता करते हैं। जबकि ऐसा कुछ नहीं है, इन एंज़ाइम्स से शिकार को पाचने में किसी तरह की कोई मदद नहीं मिलती है। शायद साँप का विष सिर्फ़ ऊतकों पर हमला करता है जिससे शिकार अशक्त हो जाता है और सांप उसे आसानी से खा सकता है।

कुछ जीवों में साँप के ज़हर के लिए प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता होती है, क्योंकि उनके शरीर में ज़हर को एक प्रणाली द्वारा बड़ी सावधानी से अलग कर दिया जाता है। इसी तकनीक का प्रयोग करके साँप के ज़हर की काट बनाई जाती है। पूरी दुनिया में 300 प्रकार के ज़हरीले साँप पाये जाते हैं, इसलिए बहुत से देश एंटीवेनम एक्सचेंज प्रोग्राम चलाते हैं जिससे साँप के काटने पर अस्पतालों को आसानी से साँप के ज़हर की सही काट मिल जाती है।