युवावस्था का आना, दिलों का बेकाबू हो जाना, दिन रात बेपरवाह होकर जीना और दोस्तों के साथ रात भर महफ़िल जमाना। हर बात पर ढेरों सवाल और कभी सवालों के बेतुके से जवाब… कुछ ऐसे ही अलग रंग कुछ अलग रूप लेकर बच्चों की किशोरावस्था और युवावस्था आती है। कुल मिलाकर किशोरावस्था और युवावस्था असमंजस और आशंकाओं से भरी हुई अवस्था होती है। इसलिए ज़रूरी है कि पैरेंट्स इस उम्र में उचित मार्गदर्शन देकर बच्चों के मन में उठने वाले सवालों के जवाब देकर उन्हें इन अचानक होने वाले इन परिवर्तनों से अवगत करायें।

बच्चों की किशोरावस्था और पैरेंट्स का साथ

बच्चों की किशोरावस्था

1. शरीरिक बदलाव । Physical Changes

किशोरावस्था की ओर बढ़ते हुए बच्चों में अचानक बहुत से शारीरिक बदलाव होते हैं। जिन परिवर्तनों से बच्चे अक्सर घबरा जाते हैं या उनके मन में बहुत सारे प्रश्न उठते हैं। ऐसे में पैरेंट्स की ये ज़िम्मेदारी बनती है कि वो उन्हें यह एहसास दिलाएं कि ये सारे बदलाव सामान्य हैं। जब वो भी इस उम्र में थे, तो वे भी इन्हीं बदलावों से होकर गुज़रे हैं।

2. प्यूबर्टी । Puberty

प्यूबिक हेयर, आवाज़ में बदलाव, चेहरे पर अचानक ढेर सारे पिंपल्स, क़द का बढ़ना, हार्मोन्स में होने वाले अचानक परिवर्तन और उनके कारणों को अक्सर बच्चे ठीक से समझ नहीं पाते हैं। इसलिए ज़रूरी है कि बच्चों की किशोरावस्था में पैरेंट्स समय से पहले बात बात में इसके बारे में या अन्य तरीक़ों से इन चीज़ों के बारे में शिक्षित करते रहें। इससे बच्चे मानसिक रूप से तैयार रहेंगे।

3. मासिक धर्म या पीरियड्स । Menstruation

लड़कियों में किशोरावस्था में होने वाले कई बदलाव में से एक बदलाव मासिक धर्म भी है। ये ज़रूरी है कि बच्ची को मासिक धर्म या पीरियड्स शुरू होने से पहले इसके बारे में पता हो ताकि अचानक पीरियड्स होने पर वह ब्लड को देखकर घबरा न जाए। इसलिए उसे इस बात का अंदाज़ा पहले से हो कि पीरियड्स होना एक नेचुरल क्रिया है। जो एक उम्र के बाद हर लड़की को होती है और इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं होती है।

4. आकर्षण । Attraction

टीनएजर्स में हार्मोनल परिवर्तन के कारण अपोज़िट सेक्स के प्रति आकर्षण भी सहज उत्पन्न हो जाता है। आज हमारे देश में इस विषय पर बात करना अनुचित समझा जाता है। विद्यालयी माहौल हो या पारिवारिक माहौल हो, दोनों ही जगह सेक्स शब्द को बुरा ही समझा जाता है। जिस वजह से बच्चे किशोरावस्था में न कुछ पूछ पाते हैं और न कोई उन्हें समझा पाता है। जिससे उनके मन में कुंठा उत्पन्न हो जाती है, जिसके परिणाम कभी कभी गंभीर हो सकते हैं। वे गलत संगत में न पड़े इसके लिए ज़रूरी है कि उन्हें इस बात से रूबरू कराए कि इस उम्र में किसी के प्रति आकर्षण होना स्वाभाविक है। इसलिए बच्चों की किशोरावस्था में पैरेंट की ज़िम्मेदारी है कि वे नए नए अट्रैक्शन को पॉजिटिविटी में बदलने की समस्त जानकारी उन्हें उपलब्ध कराएँ। जैसे – लड़की लड़के एक दूसरे से बात करें तो इस बात में कोई बुराई नहीं है। वे दोनों एक दूसरे के अच्छे दोस्त बन सकते हैं। एक दूसरे की मदद भी कर सकते है।

5. एडिक्शन । Addiction

इस उम्र में बच्चें न केवल सेक्स के प्रति आकर्षित होते हैं, बल्कि सिगरेट शराब और बाक़ी व्यसनों की तरफ़ भी आकर्षित होते हैं। इसलिए ज़रूरी है कि बच्चों की किशोरावस्था में पैरेंट्स अपने बच्चों के रोल मॉडल बने और एक अच्छा व्यवहार प्रस्तुत करें। इसके अलावा पैरेंट्स को बच्चों के दोस्तों व उनकी संगत पर भी ध्यान देना ज़रूरी है।

6. कम्युनिकेशन व विश्वास । Communication & Trust

यह ज़रूरी है कि पैरेंट्स अपने बच्चों से लगातार कम्युनिकेशन करते रहें तथा यह विश्वास भी दिलाएं कि आप हर क़दम पर उनके साथ हैं। उन्हें यह भी विश्वास दिलाएं कि अगर बच्चों से कोई ग़लती होती है तो उसे छुपाने के बजाय पैरेंट्स से शेयर करें। अत: बच्चों की किशोरावस्था में पैरेंट्स बच्चों से लगातार कम्युनेट करें, उन्हें इस बात का विश्वास दिलाएं कि वे हर परिस्थिति में उनके साथ और उनके पास है।

अतः ज़रूरी है कि पैरेंट्स अपने बच्चों से इस बारे में बात करें, ताकि बच्चा इन होने वाले परिवर्तनों से परेशान होने या कुंठित होने के बजाय इन परिवर्तनों के साथ अच्छे से एडजेस्ट कर सके।