आयुर्वेद औषधियों ख़ज़ाना है। ऐसी औषधियों का, जो हमारे आस पास पाई जाती हैं। अनेक वनस्‍पतियाँ जो घर के आस पास उगती हैं, जिनमें से अधिकांश को हम जानते हैं और अधिकांश को नहीं जानते हैं। जिन्‍हें हम जानते भी है तो उनके गुणों को नहीं जानते हैं। इन्‍हीं में से एक है तुलसी जो महा औषधि के नाम से जानी जाती है। यह शा‍रीरिक व्‍याधियों को दूर करने के साथ ही आंतरिक भावों व विचारों पर भी कल्‍याणकारी प्रभाव डालती है। जिस घर में तुलसी का पौधा है वहाँ व्‍याधियाँ नहीं प्रवेश कर पाती हैं। यह असाध्‍य व जानलेवा रोगों को निर्मूल करने में समर्थ है। इसके पत्‍ते एक माह तक बासी नहीं होते। इसके पत्‍तों, बीज व जड़ में अमृत होता है। इसमें किनोल तथा एल्कलाइड होते हैं, केरोटिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। आज हम इसके गुणों की चर्चा करेंगे।

महा औषधि तुलसी

महा औषधि तुलसी के प्रयोग

1. यौन समस्याओं का उपचार

– तुलसी की पांच-सात पत्तियाँ ख़ाली पेट रोज़ निगलने से बल, वीर्य, तेज व स्‍मरण शक्ति में वृद्धि होती है। इसकी पत्तियों को दाँत से नहीं चबाना चाहिए, सीधे निगल लेना चाहिए।

– पान में तुलसी का बीज डालकर खाने से शीघ्रपतन की समस्‍या से छुटकारा मिलता है।

– पुरुष सेक्स हार्मोन टेस्टोंस्टेरान की वृद्धि करने और पौरुष शक्ति प्रदान करने में तुलसी की मंजरियाँ काफ़ी लाभप्रद हैं।

इरेक्टाईल डिस फ़ंक्सन में तुलसी जड़ का चूर्ण व अश्‍वगंधा का चूर्ण की बराबर मात्रा गाय के दूध के साथ लेने से समस्‍या दूर हो जाती है।

– इसकी पत्तियों के नियमित सेवन से मासिक धर्म की समस्‍या में लाभ होता है। मासिक धर्म की अनियमितता समाप्‍त हो जाती है।

– पौरुष शक्ति में वृद्धि के लिए तुलसी की जड़ व पुराने गुड़ को दूध के साथ सेवन किया जाता है।

– गर्भवती महिलाओं की कमर में तुलसी की जड़ बाँधने से प्रसव वेदना कम होती है।

– चावल के पानी के साथ तुलसी की पत्तियों का रस लेने से स्त्रियों में प्रदर रोग जड़ से समाप्‍त हो जाता है।

2. शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक

– शरीर में विटामिन ए व विटामिन बी की कमी है तो इसके नियमित सेवन से यह कमी दूर हो जाती है।

– काली मिर्च के साथ चार-पांच तुलसी की पत्तियों को ख़ाली पेट सेवन करने से मधुमेह में लाभ होता है।

शरीर से विषाक्‍त तत्‍वों को बाहर निकालने में तुलसी का रस बहुत ही कारगर है।

– नींबू और तुलसी का रस मिलाकर पीने से चर्म रोग से निजात मिलती है।

– गले में तुलसी की माला धारण करने से विद्युत शक्ति नष्‍ट नहीं होती तथा संक्रामक बीमारियों की आशंका निर्मूल हो जाती है।

तुलसी के फूल

– वात व कफ रोगों में तुलसी का रस लाभदायक है। यह दर्द निवारक व रक्‍त दोष को समाप्‍त करने वाला है।

– मोटापा कम करने के लिए दही के साथ तुलसी की पत्तियों का सेवन लाभप्रद है। इससे कोलेस्‍ट्राल भी कम होता है।

– इसका नियमित सेवन रक्‍तचाप को नियंत्रित करता है, पाचन शक्ति को मजबूत करता है तथा मानसिक रोगों को दूर करता है।

– हिचकी, खांसी व श्‍वांस रोग में यह अचूक औषधि का कार्य करती है।

– तुलसी का नियमित सेवन किडनी की कार्यशक्ति में वृद्धि करता है।

– मधु के साथ तुलसी के रस का सेवन करने से किडनी को ताक़त मिलती है।

– इसके नियमित सेवन से मुंह में कभी छाले नहीं पड़ते, यदि छाले पड़े हुए हैं तो शीघ्र ही दूर हो जाते हैं।

– इसके नियमित सेवन से झुर्रियाँ ठीक हो जाती हैं तथा पैरों की बिवाइयाँ फटनी बंद हो जाती हैं।

– बाल यदि झड़ रहे हैं तो तुलसी पाउडर व सूखे आँवले का पाउडर मिलाकर सेवन करना चाहिए।

– पेट रोगों ख़ासकर अपच, गैस व कब्‍ज़ आदि में तुलसी का कोई जवाब नहीं है।

– इसके नियमित सेवन से घाव जल्‍दी भर जाते हैं तथा टूटी हड्डियाँ शीघ्र जुड़ जाती हैं।

3. जीवन में सुख लाने का उपाय

– अग्निकोण में तुलसी का पौधा लगाकर उसे नियमित जल अर्पित कर एक बार प्रदक्षिणा करने से कन्‍या के विवाह में विलंब की समस्‍या दूर हो जाती है।

– दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्‍थापित तुलसी के पौधे को हर शुक्रवार को कच्‍चा दूध चढ़ाकर किसी सुहागिन को मीठी वस्‍तु खिलाने से व्‍यापार में आने वाली बाधाएँ दूर हो जाती हैं।