आज कल की ज़िंदगी बहुत भागदौड़ भरी है और इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी को जीने वाले लोगों में मूत्र रोग व इस जैसी कई समस्याएं बदले हुए जीवन शैली के कारण इनके जीवन से जुड़ गयी है। इस कारण से न सिर्फ़ मूत्र रोग बल्कि नपुंसकता की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। एक चिकित्सक के अनुसार मूत्र विकार से बचने के लिए यौन मार्ग की सफ़ाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि सफाई के अभाव में ही संक्रमण होने की संभावना सबसे ज़्यादा रहती है। लेकिन इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में वे अपने स्वास्थ्य के प्रति थोड़ी लापरवाही कर बैठते हैं और परिणाम स्वरूप वे कई घातक बिमारियों के शिकार हो जाते हैं।

मूत्र विकार कारण और लक्षण

मूत्राशय के संक्रमण में यदि सही समय पर इलाज न किया जाए, तो यह समस्या गंभीर और बहुत ख़तरनाक हो सकती है। मूत्र विकार के अंतर्गत कई रोग शामिल हैं जैसे मूत्र की जलन, मूत्र रुक जाना, मूत्र रुक-रुककर आना और बहुमूत्र ये प्रमुख हैं। यह सभी रोग रोगी के लिए बहुत असहनीय होते हैं। यदि इनका सही समय पर उपचार न किया जाए तो इसके घातक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

ख़ास तौर से महिलाएं इन रोगों के प्रति सजग नहीं होती और समस्या को नज़रअंदाज़ कर देती हैं। परिणाम स्वरूप यह एक गम्भीर रोग बन जाता है जो बहुत जी जानलेवा भी हो सकता है। आइए मूत्र रोग के बारे में जानकारी प्राप्त करें और इस जानकारी का लाभ उठाकर लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करें।

मूत्र रोग या मूत्र विकार

मूत्र विकार या मूत्र रोग के कारण

मूत्र विकार का सबसे बड़ा कारण बैक्टीरिया, कवक है। इनके कारण मूत्र पथ के अन्य अंगों जैसे किडनी, यूरेटर और प्रोस्टेट ग्रंथि और योनि में भी इसका संक्रमण का असर देखने को मिलता है।

मूत्र विकार के लक्षण

मूत्र रोग के कई लक्षण हैं जैसे तीव्र गंध वाला पेशाब होना, पेशाब का रंग बदल जाना, मूत्र त्यागने में जलन और दर्द का अनुभव होना, कमज़ोरी महसूस होना, पेट में पीड़ा और शरीर में बुखार की हरारत बने रहना है। इसके अलावा हर समय मूत्र त्यागने की इच्छा बनी रहती है। मूत्र पथ में जलन बनी रहती है। मूत्राषय में सूजन आ जाती है।

यह रोग पुरुषों की तुलना में स्त्रियों में ज़्यादा पाया जाता है। गर्भवती स्त्रियां और सेक्स-सक्रिय औरतों में मूत्राषय प्रदाह रोग अधिक पाया जाता है।

मूत्र रोग का घरेलू उपचार

1. खीरा ककड़ी

मूत्र रोग में खीरा ककड़ी का रस बहुत फ़ायदेमंद है। अगर रोगी को 200 मिली ककड़ी के रस में एक बडा चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर हर तीन घंटे के अंतर पर दिया जाए तो रोगी को बहुत आराम मिलता है।

2. तरल पदार्थ

पानी और अन्य तरल पदार्थों का प्रचुर मात्रा में सेवन 15 – 15 मिनट के अंतर पर कराने से रोगी को बहुत आराम मिलता है।

3. मूली के पत्तों का रस

मूत्र विकार में रोगी को मूली के पत्तों का 100 मिली रस दिन में 3 बार सेवन कराएं। यह एक रामबाण औषधि की तरह काम करता है।

4. नींबू

नींबू स्वाद में थोड़ा खट्टा तथा थोड़ा क्षारीय होने के साथ साथ एक गुणकारी औषधि है। नींबू का रस मूत्राषय में उपस्थित जीवाणुओं को नष्ट कर देता है तथा मूत्र में रक्त आने की स्थिति में भी लाभ पहुँचाता है।

5. पालक

पालक का रस 125 मिली, इसमें नारियल का पानी मिलाकर रोगी को पिलाने से पेशाब की जलन में तुरंत फ़ायदा प्राप्त होगा।

6. गाजर

मूत्र की जलन में राहत प्राप्त करने के लिए दिन में दो बार आधा गिलास गाजर के रस में आधा गिलास पानी मिलाकर पीने से फ़ायदा प्राप्त होता है।

7. मट्ठा

आधा गिलास मट्ठा में आधा गिलास जौ का मांड मिलाएं और इसमें नींबू का रस 5 मिलि मिलाकर पी जाएं। इससे मूत्र-पथ के रोग नष्ट हो जाते है।

8. भिंडी

फ्रेश भिंडी को बारीक़ काटकर दो गुने जल में उबाल लें। बाद इसे छानकर यह काढ़ा दिन में दो बार पीने से मूत्राषय प्रदाह की वजह से होने वाले पेट दर्द में राहत मिलती है।

9. सौंफ

सौंफ के पानी को उबाल कर ठंडा कर लें और दिन में 3 बार इसे थोड़ा थोड़ा पीने से मूत्र रोग में राहत मिलती है।

यह एक गम्भीर समस्या है लेकिन सही समय पर जागरूक होकर इस बीमारी और इसकी समस्या को बढ़ने से रोक सकते है।
हमारी इस पोस्ट का भी यही उद्देश्य है कि आप लोग सजग और जागरूक बनें और इस पोस्ट को सोशल सर्किल पर शेयर कर दूसरों को भी जाग्रत करें।

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