नेहा ग़रीब परिवार में रहती है। वो और उसके पति नियमित मज़दूरी करके अपना जीवन यापन करते हैं। शादी के 5 साल हुए और इन 5 सालों में नेहा 3 बार गर्भवती हुई और हर बार बेटी होने के कारण उसका पति उससे हमेशा नाख़ुश रहता और हर बार एक बेटे की चाहत रखने के कारण आज वो 3 बेटियों का पिता है। लेकिन इस बात से दुखी उसके पति ने प्रसव के बाद ही अपनी पत्नी को फ़ौरन मजदूरी व अन्य भारी भरकम काम में जुटा दिया। आज बीस साल की नेहा तीन बोटियों को जन्म दे चुकी थी। इसके बाद भी उस पर बेटा पैदा करने का दबाव बना रहा। उसने बताया कुछ समय पहले उसने बेटे को जन्म दिया था लेकिन दो हफ़्ते बाद ही गर्भाशय भ्रंश होने के कारण उसको भारी रक्तस्राव होने लगा और गर्भाशय लटककर योनि के बाहर आ गया। जिस कारण उसे अक्सर गीलेपन और दूसरी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जब उसने अपने पति को अपनी परेशानी के बारे में बताया तो उसने उसे ‘गंदी औरत’ कहते हुए और भी मारा। नेहा की परेशानी कम होने के बजाय और बढ़ती चली गई।

गर्भाशय भ्रंश

अगर नेहा को प्रसव के बाद शारीरिक आराम और समय पर शारीरिक भोजन मिलता तो नेहा गर्भाशय भ्रंश से बच सकती थी। यदि आपके घर में भी कोई महिला गर्भाशय के रोग से पीड़ित है तो उसे नज़रअंदाज़ न करें। अधिक जानकारी के लिए आज हम आपको इस गर्भाशय भ्रंश की उचित जानकारी देने जा रहे हैं ताकि फिर कोई महिला इस समस्या से न गुजरे।

गर्भाशय भ्रंश का अर्थ

गर्भाशय भ्रंश यानि गर्भाशय का अपनी जगह से खिसक कर योनि के बाहरी हिस्से तक पहुंच जाना गर्भाशय भ्रंश या प्रोलैप्स ऑफ़ यूटेरस (Uterine Prolapse) कहलाता है। आमतौर पर यह रोग महिलाओं में रजोनिवृत्ति यानि मेनोपॉज के बाद होता है।

गर्भाशय भ्रंश का कारण

महिलाओं में अत्यधिक शारीरिक कमज़ोरी, प्रसव के बाद अधिक समय तक विश्राम न करना, मूत्ररोग, गर्भाशय के भार का बढ़ना, ज़्यादा भार का उठाना आदि गर्भाशय भ्रंश के कारण है।

गर्भाशय भ्रंश का लक्षण

ऐसे में महिला को तेज़ी से खाँसने, हँसने या ताक़त लगाकर काम करने से मूत्र की कुछ बूँदें बाहर निकल आती हैं और यह भ्रंश योनि के छिद्र के बाहर दिखता है जिसे सिस्टोसिल कहते हैं।

ऐसे में महिला जब ताक़त लगाकर कोई काम करती है तो ऐसा लगता है कि योनि से कुछ नीचे उतर रहा है। इस स्थिति में रोगी महिला का मूत्र नियंत्रण समाप्त हो जाता है। उसके पेट में तनाव उठता है। कमर व बाजू में खिंचाव व दर्द उठता है यह दर्द चलने फिरने से और बढ़ जाता है और योनि में अत्यधिक स्राव की उपस्थिति प्रारम्भ हो सकती है।

गर्भाशय भ्रंश के उपचार

1. रोगी महिला को हल्का व सुपाच्य भोजन दें।

2. रोगी महिला को पौष्टिक आहार देना चाहिए।

3. उसे ज़्यादा से ज़्यादा आराम प्रदान करें। दौड़ने, कूदने और भारी सामान उठाने न दें।

4. घृत, वृहदशतावरी और अशोकधृत आदि जड़ीबूटी का सेवन कराना चाहिएं ।

5. चिकित्सीय परामर्श लें और रोगी महिला के स्वास्थ का विशेष ध्यान रखें।

6. इस अवस्था में शल्य चिकित्सा को सर्वोत्तम चिकित्सा माना गया है।

महिला के गर्भधारण से लेकर प्रसव तक और प्रसव के बाद भी उचित देखभाल की ज़रूरत होती है।अतः उनके स्वास्थ्य का उचित ख़याल रखें।